बीसों भागों में बटे चेहरे को चिकित्सकों ने जोड़ा लाइफ लाइन की ट्रामा टीम ने किया कारनामा
बीसों भागों में बटे चेहरे को चिकित्सकों ने जोड़ा
लाइफ लाइन की ट्रामा टीम ने किया कारनामा
आजमगढ़। कहते हैं कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है, एक सड़क हादसे में 15 दिन पूर्व अपने चेहरे का दाहिना हिस्सापूरी तरह गंवा बैठी एक महिला जिसके चेहरे के बीसों टुकड़े हुए थे, नाक दो जगहों से कट कर अलग हो चुकी थी के परिजन भी उसके जीवन की आस छोड़ चुके थे ऐसे में जनपद के लाइफ लाइन हास्पीटल के चिकित्सकों की विशेषज्ञ टीम ने अपने कठिन परिश्रम के बल पर न केवल उसके जीवन की रक्षा की वरन उसे 15 दिनों के अंदर इस लायक बना दिया कि वह अपने दो मासूमों की परवरिश पुराने तरीके से कर सके।
निजामाबाद तहसील के अनुसईदपुर गांव निवासी ऊधम सिंह अपनी पत्नी कुसुम के साथ 24 नवम्बर को शहर स्थित अपने आवास से बाइक से निकले ही थे कि तेज रफ्तार मैजिक गाड़ी ने उनकी बाइक को धक्का मार दिया और दंपति को रौंदते हुए भाग निकली। दुर्घटना इतनी भयंकर थी कि कुसुम के चेहरे का दांया हिस्सा आंख सहित मांस के लोथड़े में तब्दील हो गया। हड्डियां टूट कर लटक गयीं। बीसों टुकड़ों में चेहरा बदल गया और चोट अंदर तक पहुंच गयी। ऊधम सिंह को भी खासी चोटें आयीं। दंपति को तत्काल 108 एंबुलेंस से सदर हास्पीटल पहुंचाया गया जहां दोनों कोमा की स्थिति में थे। चिकित्सकों ने तत्काल पति पत्नी को लाइफ लाइन हास्पीटल भेज दिया। जहां चिकित्सकों की टीम ने ऊधम सिंह को अन्य सेंटर पर भेजने के साथ गंभीर अवस्था में घायल कुसुम जिसके जीवन की आस उसके परिजन भी छोड़ चुके थे का इलाज प्रारंभ किया। कुसुम के न तो हर्ट बीप मिल रहे थे न तो बीपी। चिकित्सकों ने दो घंटे की सर्जरी के उपरांत कुसुम के लिए सांस लेने का रास्ता बना दिया और तत्काल उपचार शुरु कर दिया। ब्रेन के अंदर चोट होने के साथ सूजन भी हो गयी थी। चेहरा बीस टुकड़ों में बटा हुआ था। चेहरे की हड्डियां एक सेमी से लेकर तीन सेमी के छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरी पड़ी थी। मांस लटक रहा था। लेकिन कहा गया है कि जाको राखे साइयां मार सकै ना कोय। चिकित्सकों के प्रयास को ईश्वरीय आशीर्वाद मिला। सांस लेने का रास्ता बनने के साथ ही कुसुम की स्थिति स्टेबल हो गयी। अगले दिन न्यूरो सर्जन डा.अनूप मैग्जीलो फेसियल सर्जन डा.जगदम्बा पाण्डेय व उनकी टीम डेंटल सर्जन डा.पीयूष, आई सर्जन डा.श्रवण यादव के साथ ही एनेस्थेटिस्ट डा.गायत्री व अन्य डाक्टरों की टीम ने 6 घंटे की मैराथन सर्जरी करते हुए जनपद के चिकित्सा क्षेत्र में इतिहास रच दिया। महिला के चेहरे के टुकड़े-टुकड़े को जोड़ कर फिर से उसे पुराना चेहरा देने का पूरा प्रयास किया। 15 दिनों के अंदर महिला इस लायक हो गयी कि वह अपने सारे कार्य पुराने तरीके से सम्पादित करने लगी। अपने अनुभव साझा करते हुए डा.जगदम्बा ने बताया कि चेहरे की हड्डियां इस कदर टूटी हुई थी कि कौन सी हड्डी कहां लगेगी यह रिअरेंज करना चुनौतीपूर्ण था। हड्डियों को प्लेट व स्क्रू से कसने के बाद मसल्स और सिलाई का कार्य किया गया। वहीं न्यूरो सर्जन डा.अनूप ने बताया कि इस चुनौतीपूर्ण कार्य के बाद जनपद में वह चिकित्सा सुविधाएं जो केवल बड़े शहरों में ही उपलब्ध थीं के मामले में आजमगढ़ ने हस्तक्षेप किया है।


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