वो सितम पे सितम मुझपे ढाते गए

वो सितम पे सितम मुझपे ढाते गए
हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए
जिनकी खुशियों की खातिर मरते रहे
वो रिश्ते नाते ही दिल को रुलाते गए
आंखों में आंसुओं की कमी ना रहे
हम समंदर में पानी को लाते गए
दीवानगी ने कभी हार मानी नहीं
मेरी मुुहब्बत भले वो ठुकराते गए

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