मुझे तो आखिरी घर तक दिया जलाना है
बदलाव
इस विद्यालय के आगे कॉन्वेंट भी शर्माते हैं
बासूपार बनकट का प्राथमिक विद्यालय बना रोल माडल
प्रधान व प्रधानाध्यापक ने मिलकर बदली सूरत
प्रदीप तिवारी
आजमगढ़। किसी की जिद और अपने लक्ष्य के प्रति जुनून क्या कुछ नही करवा सकता यह एहसास होता है उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के एक स्कूल प्राथमिक विद्यालय बासूपार बनकट को देखकर। गांव की महिला प्रधान व उनके पति तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक सहित पूरे स्टाफ ने कायाकल्प नही पूरे विद्यालय की काया ही पलट कर दी, जिसे देखते ही हर कोई कह उठता है साहब ! इस स्कूल ने तो कान्वेंट विद्यालयों को पीछे छोड़ दिया है।
सगड़ी तहसील के मुख्यालय से लगभग 1 किलोमीटर के अंदर ही बासूपार गांव की सरहद शुरू हो जाती है लेकिन यह गांव अपने बुनियादी विकास से कोसो दूर था। पूरे गांव की आबादी लगभग 200 घरों की है, बहुतायत मुस्लिम और अनुसूचित जाति के परिवार हैं। आज से तीन साल पहले की बात करें तो गांव के हर घर के बाहर एक छोटा गड्ढा होता था जिसमें घर का गंदा पानी इकट्ठा होता था और लोग उसे रोज उलीचा करते थे। पूरा गांव गंदगी से जूझता हुआ जल निकासी की समस्या से बजबजाता रहता था। इसी गांव के एक पूरवे में एक प्राथमिक विद्यालय था आज भी है लेकिन उसे ”था” ही कहना उचित होगा। हालत इतनी खराब थी कि मई 2023 एक अधिकारी वहां विजिट करने आये तो उन्होने विजीटर रजिस्टर पर यह टिप्पड़ी लिखी कि विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता अच्छी है लेकिन भौतिक स्थिति अति दयनीय है। उस अधिकारी ने प्रधानाध्यापक को इस निगाह से देखा कि उनकी टिप्पड़ी प्रधानाध्यापक धनन्जय मिश्रा के कलेजे में धस गई लेकिन कर भी क्या सकते थे ? बात आई गई हो गई लेकिन यह बात प्रधानाध्यापक को सालती रही। विद्यालय के रास्ते से होकर गांव के प्रधान सिद्यिका परवीन व उनके पति अब्दुल वहाब की गाड़ी अपने बच्चों के साथ शहर के अति आधुनिक विद्यालय में पढ़ने जाते थे। उसी प्राथमिक विद्यालय में पढ़े अब्दुल वहाब से गांव के स्कूल की हालत देखी नही गई, उन्होने इस सोच के साथ जब मेरे अपने बच्चे एक बेहतरीन अत्याधुनिक स्कूल में शिक्षा ले सकते हैं तो मेरे गांव के बच्चे क्यों नही ? इसी सोच से एक बदलाव की शुरूआत हुई, कभी अपनी हालत पर आंसू बहाने वाला उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद का यह विद्यालय आज अवस्थापना सुविधाओं के मामले में शहर के कान्वेंट विद्यालयों को पीछे छोड़ता नजर आता है। विद्यालय के सभी कमरों में एसी लगा हुआ है, एक अत्याधुनिक लाईब्रेरी जिसमें दुनिया भर की बेहतरीन किताबें सजी हुई जिसमें बैठकर आप घंटो पढ़ सकते हैं। लाइब्रेरी के अंदर 24 घंटे वातानुकिलत वातावरण की सुविधा है, बेहतरीन ईजी चेयर और आंखों को नुकसान न पहुंचाने वाले इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट व इंटरनेट से आच्छादित यह पुस्तकालय आनलाइन व आफलाइन शिक्षा का एक बेहतरीन केंद्र बना हुआ है। स्कूल समय तक परिषदीय विद्यालय के बच्चों के लिये उसके उपरांत गांव के होनहार युवओं के लिये जो पढ़ाई करना चाह रहे यह लाईब्रेरी रात के 11 बजे तक सेवा दे रही है। एक समूह के माध्यम से एक युवक को तैनात किया गया है जो लाइब्रेरी की देख रेख करे। इसके पीछे की सोच यह रही कि जब घर का युवा एक सरकारी प्राईमरी स्कूल में अपने ज्ञान की भूख मिटाने जायेगा तो उस घर के छोटे बच्चे क्यांे नही आयेंगे। साथ ग्रामीणों का स्नेह भी उस स्कूल के प्रति बढ़ेगा क्योंकि वो सीधे तौर पर विद्यालय से जुड़ रहे हैं। विद्यालय में बच्चे एक सामान्य परिषदीय विद्यालय के बच्चों की तरह जमीन पर बैठकर खाना नही खाते इस विद्यालय में बच्चों को मिड डे मील खाने के लिये एक डाइनिंग टेबल लगा हुआ जिस पर एक साथ 25 बच्चे बैठकर खाना खा सकते हैं। यही नही इस विद्यालय का किचन किसी फाइव स्टार होटल से कम नही दिखता। किचन के सामानों पर स्लिप चिपकी हुई, करीने से सजे बर्तन साफ-सफाई व हाईजीन यह बताती है कि किसी ने बड़े प्यार से यह सोचा है कि उनके यहां खाना खाने वाले बच्चों का तो पेट भरे ही साथ ही उनके चेहरे की मुस्कान बनी रहे। विद्यालय का कैंपस छोटा ही है लेकिन क्या मजाल कि वहां खेलने के किसी सामान की कमी हो, अगर आप के पास समय है तो छोटे से छितवन पेड़ की छांव मंे लगे झूले पर बैठकर आप अपनी थकान दूर कर सकते हैं। विद्यालय परिसर में जो भी जगह खाली मिली वहां की फुलवारी ईको क्लब की सरकार की अवधारणा को पूर्ण करती दिख रही है। देख के पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अबुल कलाम आजाद को समर्पित कार्यालय हो या आजमगढ़ की साहित्यिक थाती के महापंडित राहुल सांकृत्यायन व अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, कैफी आजमी, अल्लामा शिब्ली नोमानी अमर बलिदानी गोगा साव -भीखी साव को समर्पित कक्षाकक्ष हर एक कोना एक संदेश देता दिखता है। डेस्क बेंच पर बैठकर यहां के बच्चे पढ़ते हैं, कमरों में एसी लगा हुआ है। विद्यालय के फर्श की टाइल ऐसी हैं जैसे किसी रईस के घर में लगी हुई हों। विद्यालय के हर कमरे में प्रोजेक्टर लगा हुआ है, अर्थात शिक्षक पढ़ायेंगे भी दिखायेंगंे भी। पूरा कैंपस सीसी टीवी कैमरे से आच्छादित है जिसकी मानीटरिंग आफिस से होती है। यहां तक इसे वाई-फाई से जोड़कर विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की मोबाइल से लाइव जोड़ दिया जायेगा कि वह घर बैठे देख सकें कि उनका बच्चा इस समय स्कूल में क्या कर रहा है। बच्चों को पीने के लिये एक बड़ा सा आर.ओर कूलिंग प्लांट लगा हुआ है जिसमें न केवल आर ओ का वरन ठंडा पानी मिलता है। आगामी 24 जुलाई को इस विद्यालय का लोकार्पण है, विद्यालय की लोकप्रियता का आलम यह है कि बच्चे समय से पहले ही स्कूल पहुंचने लगते है और छुट्टी के बाद भी देर तक रूकना चाहते हैं। वही अधिकारी जब जुलाई 2025 में एक बार फिर इस विद्यालय के विजिट पर आये तो उन्हे वह विद्यालय कहीं नजर ही नही आया उसकी जगहं खड़ा था ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक की सोच का एक नया विद्यालय जिसके चमचमाते फर्श पर चलते हुये वह भी सोच रहे थे कि कहीं यह गंदे न हो जायं। आज जब प्राथमिक विद्यालय अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं ऐसे प्राथमिक विद्यालय बासूपार बनकट से एक बदलाव की मीठी बयार बहती हुई दिख रही है। सवाल यही है कि पूरे देश के सरकारी विद्यालयों के लिये क्या यह विद्यालय रोल माडल नही बन सकता ? अगर नहीं, तो प्रदेश के लिये तो बन ही सकता है।
आसान नही होता किसी भी तरह का बदलाव - अब्दुल वहाब
आजमगढ़। इतना सब कुछ होने में धन तो खर्च हुआ ही होगा और कितना आसान था यह सफर जब ग्राम के प्रधानपति व समाजसेवी अब्दुल वहाब से इस बात का जिक्र होता है तो उन्होने कहा कि बदलाव इतना भी आसान नही होता, यह जो मैने किया है वह इतना आसान नही था, एक-एक अधिकारी को समझाना पड़ा है जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेना पड़ा है साथ ही ग्राम निधि का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया गया है तब यह हमारे प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के सपनों का स्कूल बनकर तैयार हुआ है। मैने तो अपनी पूरा दमखम लगाकर इस विद्यालय को बनवाकर दे दिया है, अब विभाग के अधिकारी व यहां के अघ्यापकों की जिम्मेदारी है कि इसे बचाये रखें और यहां बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वहाब मुस्कुराते हुये एक शेर के हवाले से अपनी इच्छा बताते हैं कि
तुम अपने पास रखो अपने सूरजों का हिसाब,
मुझे तो आखिरी घर तक दिया जलाना है ।
ग्रामीण बच्चों को भी मिले गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा
आजमगढ़। विद्यालय के प्रधानाध्यापक धनन्जय मिश्र कहते हैं कि ग्रामीण परिवेश के बच्चे एक अच्छी शिक्षा से वंचित न रह जायें यह सोचकर यह सारे बदलाव किये गये हैं। आशा है कि यह विद्यालय क्षेत्रीय जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।
24 जुलाई को होगा लोकार्पण
आजमगढ़। विद्यालय के अत्याधुनिक भवन के लोकार्पण की तैयारियां जोरो पर चल रही हैं आगामी 24 जुलाई एक भव्य समारोह में जिसमे जिले भर की शिक्षा से जुड़ी शख्सियतों व अधिकारियों के बीच इसे लोकार्पित किया जायेगा तथा नये कार्यों का उद्घाटन होगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विद्यालय
आजमगढ़। विद्यालय की फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही। इंस्ट्राग्राम व फेसबुक इन्फ्लुएंसर, यू ट्यूबर व रील बनाने वाले भी विद्यालय पर पहुंच रहे हैं। रील इस कमेंट के साथ वायरल हो रही हैं ऐसे विद्यालय मर्जर का विकल्प बन सकते हैं।


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