एक ऐसा विद्यालय जहां स्वीमिंग पुल में नहाते हैं बच्चे और दूरबीन से निहारते हैं चांद को
एक ऐसा विद्यालय जहां स्वीमिंग पुल में नहाते हैं बच्चे और दूरबीन से निहारते हैं चांद को
अजमतगढ़ शिक्षा क्षेत्र के दाम महुला में स्थित परिषदीय विद्यालय बना चर्चा का विषय
सीसी कैमरे से घर बैठे अभिभावक देख लेते हैं बच्चों का हाल
आजमगढ़। सगड़ी तहसील के अजमतगढ़ शिक्षा क्षेत्र में एक ऐसा भी विद्यालय है जहां के बच्चे स्वीमिंग पुल में नहाते हैं और दूरबीन से चांद की धरती को निहारते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं प्राथमिक विद्यालय दाम महुला की, इन दिनों यह विद्यालय का चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के तहत संचालित होने विद्यालयों में नित नये नवाचार देखने को मिल रहे हैं। सरकार विद्यालयों की हालत दुरूस्त करने के लिये जहां विकास विभाग की मदद से कायाकल्प योजना चला रही है, वहीं शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये भारत सरकार के निपुण मिशन को युद्धस्तर पर क्रियाशील किये हुये है।
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में कुछ ऐसे अध्यापक हैं जो परिषदीय विद्यालयों की गरिमा को बनाये रखने के लिये दिन रात मेंहनत कर रहे हैं, उनकी मेंहनत विद्यालयों पर दिखती भी है। अजमतगढ़ क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय बासूपार बनकट अभी तो पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है तो वहीं एक और विद्यालय उसी तरह से खुद को विकसित करना चाह रहा है लेकिन विकास विभाग का सहयोग नहीं मिल पा रहा। प्राथमिक विद्यालय दाम महुला सगड़ी तहसील के उत्तरी छोर पर स्थित है । यह घाघरा के बाढ़ ग्रस्त इलाके के अर्न्तगत आता है लेकिन यह अपनी सोच में कान्वेंट विद्यालयों से टक्कर लेता नजर आता है। विद्यालय में कक्षा एक से लेकर पांच तक कुल 138 विद्यार्थियों का नामांकन है। उन्हे पढ़ाने के लिये एक हेडमास्टर, तीन सहायक व तीन ही शिक्षामित्रों को तैनात किया गया है। विद्यालय का नेतृत्व अविनाश शाही करते हैं। यहां के अध्यापकों ने अपने सहयोग से प्रत्येक कमरे को स्मार्ट क्लास के रूप में डेवलप करने का प्रयास किया है। विद्यालय में कुल पांच कमरे हैं और प्रत्येक में स्मार्ट टीवी लगी हुई है। पूरे कैंपस वाई - फाई से लैस है। पूरे परिसर की निगरानी सीसी कैमरे से होती है, विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक भी घर बैठे ही अपने बच्चों का हाल लाइव देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर प्रोजेक्टर की सहायता से आडियो विजुअल के द्वारा बच्चों को पढ़ने वाली सामग्री प्रदर्शित की जाती है। विद्यालय में एक कम्प्यूटर भी अध्यापकों ने लगा रखा है। प्रिंट रिच मैटीरियल की कमी न हो इसके लिए प्रिंटर भी है साथ ही बरामदे के हर पोल पर फैन लगा हुआ है
विद्यालय परिसर में नजर दौड़ाने पर हर तरफ हरियाली ही नजर आती है,एक-एक पेड़ - पौधे का परिचय व क्यू आर कोड से मिलती जानकारी तथा जीओ टैगिंग यह बताता है कि विद्यालय परिवार पर्यावरण सुरक्षा के प्रति चैतन्य है। विद्यालय बाढ़ ग्रस्त इलाके में है इसलिये यहां के अध्यापकों ने यह सोचा कि विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए यहां के बच्चों को तैराकी आनी चाहिये तो सबने मिलकर एक तरणताल बना डाला जो यहां के पूर्व प्रधानाध्यापक रहे स्व. रामाशीष राय को समर्पित है। बच्चे इस स्वीमिंग पुल में तैराकी का हुनर सीखते हैं और गर्मी में आनंद भी लेते हैं।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग से करते है जल संरक्षण
आजमगढ़। विद्यालय कैंपस में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी डेवलप किया गया है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अविनाश शाही बताते हैं कि विद्यालय का कैंपस कच्चा है बरसात के दौरान जितना भी पानी कैंपस मे आता है चाहे वह विद्यालय की छत पर गिरा हो या कैंपस में, पाइपों के माध्यम से विद्यालय मे बनाये एक स्पेशल पिट जो कि पाइपों से जुड़ा है और सुरक्षा की दृष्टि से ढका हुआ है जमीन के अंदर चला जाता है जो भूगर्भ जल संरक्षण का कार्य करता है।
बाइनाकुलर टेलीस्कोप से दिखता है चांद का नजारा
आजमगढ़। बच्चों में खगोलीय ज्ञान की समझ विकसित करने के लिये विद्यालय में एक बाइनाकुलर टेलीस्कोप भी रखी है जिससे चांद के धब्बे बड़ी आसानी से दिख जाते हैं। गर्मी के दिनों में जब कोई अध्यापक शाम को रूकता है तो विद्यालय के आस-पास रहने वाले बच्चे अपने अभिभावकों की अनुमति से विद्यालय में आ जाते हैं और टेलीस्कोप से चांद की धरती तक सैर कर आते हैं।
एसी का बजट न हुआ तो लगाया हर कमरे में कूलर
आजमगढ़। विद्यालय में बच्चे आराम से पढ़ सके इसके लिये अध्यापकों ने एसी लगवाने की सोचा, लेकिन बजट की व्यवस्था न बन पायी तो सबने मिलकर हर कमरे के लिये कूलर ही लगा दिया। अब लाइट रहती है तो ठंडी हवा बच्चों को राहत देती है।
ब्लाक प्रमुख ने लगवाया आर ओ वाटर कूलर
आजमगढ़। अजमगतगढ़ की ब्लाक प्रमुख अलका मिश्रा ने जब विद्यालय के प्रति अध्यापकों का समर्पण देखा तो उन्होने अपनी तरफ से बच्चों को स्वच्छ पानी पीने के लिये आर ओ कूलर प्लांट लगा दिया है अब बच्चे ठंडा आर ओ के पानी का आनंद लेते हैं।
जरूरतें और भी हैं--
आजमगढ़। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अविनाश शाही से जब बात की जाती है कि आपके विद्यालय पर अभी क्या-क्या जरूरत है ? तो वह कहते हैं कि विद्यालय में टाइलीकरण नही हो पाया है, जंगले और खिड़कियां पुराने हो चुके हैं, शौचालय अपनी मरम्मत के इंतजार में है विकास विभाग व पंचायत का सहयोग मिल जाता तो यह कार्य आसानी से हो जाते। कक्षा 1,2 और 3 के लिये डेस्क बेंच तो हो गया है लेकिन अभी 4 और 5 के बच्चों के लिये बाकी है।



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