हवा तो सर्द थी लेकिन सुलग रहा था कोई
हवा तो सर्द थी लेकिन सुलग रहा था कोई
चांदनी रात में तन्हा झलक रहा था कोई
हुआ है क्या शहर में उसे खबर ही नहीं
शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई
मोड़ कितने ही मिले पर कहीं मुड़ा था नहीं
बस एक राह पे चलता सिसक रहा था कोई
किसी से उसका मरासिम रहा होगा शायद
याद में डूबके आंखों से छलक रहा था कोई
चांदनी रात में तन्हा झलक रहा था कोई
हुआ है क्या शहर में उसे खबर ही नहीं
शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई
मोड़ कितने ही मिले पर कहीं मुड़ा था नहीं
बस एक राह पे चलता सिसक रहा था कोई
किसी से उसका मरासिम रहा होगा शायद
याद में डूबके आंखों से छलक रहा था कोई
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