आजमगढ़ मेें कोरोना योद्धा बन गये हैं डा. मनीष

पिता डा. आर बी त्रिपाठी कोरोंटाइन किये गये लोगों  को करा रहे योगा

कोरोंटाइन सेंटर बनाने के लिये दिया विद्यालय

पीएम केयर फंड में दिया एक लाख, घर-घर पहुंचा रहे राशन
पीएम केयर फंड में  एक लाख रूपये का चेक प्रदान करते डा. मनीष


आजमगढ़। आजमगढ़ जनपद क्या पूरे पूर्वांचल में हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान रखने वाले डा. आर बी त्रिपाठी विजय सुपर फेसलिटी हास्पीटल चलाते हैं, कई चिकित्सकीय शैक्षिक संस्थानों के कर्ता धर्ता हैं, सहयोगकर्ता तो जरूर ही हैं। इनके छोटे पुत्र डा. मनीष त्रिपाठी हैं एमबीबीएम डी आर्थो की डिग्री धारक डा. मनीष त्रिपाठी कोरोना महामारी में एक युवा योद्धा के तरह उभरे हैं, आजमगढ़ जनपद के हर कोने पर उनकी फारचूनर गाड़ी पहुंच रही और कोई भूख से मरने न पाये इस बात को सुनिश्चित कर रहे हैं। पिता-पुत्र डा. आर बी त्रिपाठी व मनीष त्रिपाठी ने जैगहा स्थित अपने विशाल शैक्षिक संस्थान जो उनका निजी संस्थान है खुद पहल कर प्रशासन को कोरोंटाइन सेटर बनाने के लिये दे दिया है। महत्वपूर्ण तब हो जाता जब आर बी त्रिपाठी खुद वहां जाकर निस्वार्थ भाव से कोरोंटाइन किये लोगों को योगा कराते हैं उनको स्वस्थ होने में हर तरह से मदद कर रहे हैं। 
योग कराते हुए डॉ र आर बी त्रिपाठी 

चौदहवीं शताब्दी में जन्मे कबीर दास ने लिखा है कि ”ऊंचे कुल का जनमिया, करणीं ऊंच न होई“ अर्थात केवल ऊंचे खानदान में  जन्म लेने मात्र से काई ऊंचा अर्थात बड़ा नही हो जाता बड़ा होने के लिये उसमे बड़प्पन के गुण भी होने चाहिये। निसंदेह आर बी त्रिपाठी चिकित्सकीय पेशे का एक बड़ा नाम है और समय-समय पर डा. आर बी त्रिपाठी समाजसेवा के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते ही रहते हैं। धीरे-धीरे उन्ही के नक्शे कदम पर उनके छोटे पुत्र डा. मनीष त्रिपाठी चल पड़े हैं। लाक डाउन के बाद प्रधानमंत्री के आह्वाहन पर डा. मनीष को केवल सूचना भर मिलने की देर होती कि इस गांव में कोई भूखा है या राशन आनाज की जरूरत है, डा. मनीष का कारवां निकल पड़ता है चाहे वह गांव जनपद मुख्यालय के सुदूर उत्तर देवारा में हो या फिर पश्चिम अतरौलिया से जनपद बार्डर तक बिना थके डा. मनीष की टीम मानवता की सेवा में लगी है।
उनकी गाड़ी में राशनो  का पैकेट खाली होते ही फिर से भर दिया जाता है क्या पता कहां निकलना पड़ जाये। यही नही जितने भी जनपद के थाने हैं लगभग हर थाने पर जाकर खुद उनकी टीम ने हर पुलिस जवान के लिये मास्क, सेनेटाइजर आदि उपलब्ध कराया। जब मजदूरों के आने का सिलसिला चला तो पांच हजार लंच पैकेट भूखे मजदूरों जो पैदल चल कर अतरौलिया सेंटर तक पहुंचे थे उनको उपलब्ध कराया गया। सबसे बड़ी बात है कि राशन जिसमे साबुन सेनेटाइजर सहित आनाज तेल सब्जी तो है ही साथ ही मांगे जाने पर निशुल्क दवा भी उपलब्ध कराया जा रहा है। हरिहरपुर, माधोपुर, टेढ़वा सहित दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां डा. मनीष की गाड़ी का लोगों को इंतजार रहता है। इनकी टीम में सहयोग कर रहे संजय सिंह, शिवशंकर पाण्डेय, रमाशंकर पाण्डेय से यह हमेशा फीड बैक लेते रहते हैं। रविवार को डा. मनीष ने मानवता के इस कार्य में एक कदम और आगे बढ़ते हुये पीएम केयर फंड में एक लाख रूपये का चेक भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह व प्रदेश कमेटी के सदस्य अखिलेश मिश्रा गुड्डू को प्रदान किया। डा. मनीष कहते हैं कि आज देश को हमारी जरूरत है आज तक सबकुछ हमने इस देश से लिया है अब देश को देने की बारी है। कोरोना के ऐसे विरले योद्धाओं को लिये सैल्यूट तो बनता है।

 


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