हारेगा कोरोना : एक अपील और जमा हो गये चार करोड़ 18 लाख
डीएम की पहल व प्रेरणा ने दिखाया रास्ता
आरटीजीएस के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा की गई राशि
आजमगढ़। कई बार बड़े होने की वजह से केवल आदेश देना नही होता है। बड़े होने का फर्ज आगे आकर अगुवाई करने व सबको प्रेरित करने का भी होता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है आजमगढ़ जनपद के जिलाधिकारी एन पी सिंह ने। कोरोना जैसी महामारी में सरकारी कर्मचारियों द्वारा जहां एक दिन का वेतन स्वेच्छा से दान किया जा रहा है वहीं जिलाधिकारी ने अपना दस दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया। जिलाधिकारी की प्रेरणा पर जनपद के सभी विभाग के कर्मचारियों ने आपदा की इस घड़ी में अपना एक दिन का वेतन दिया जिससे एकत्र चार करोड़ 18 लाख की राशि डीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष में शुक्रवार को जमा करके एक मिशाल प्रस्तुत की है।
साहित्यमना व संवेदनशील अधिकारी के रूप में अपनी पहचान रखने वाले जिलाधिकारी नागेंद्र प्रताप सिंह लीक से हटकर छात्रों, जरूरतमंदों की मदद के लिये जाने जाते हैं। मुसहर व वनवासियों के लिये किया गया उनका कार्य कोई भूला भी नही। जरूरतमंदों व मजलूमों के लिये हमेशा आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हे अच्छे काम करने व समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की जो ललक उनके अंदर है वह विरले ही दिखाई पड़ती है। कोरोना जैसी महामारी में जिलाधिकारी कड़ी मेंहनत कर रहे हैं, खुद आगे कदम बढ़ा कर वो सारे कार्यों की अगुवाई भी कर रहे हैं। जब बात आई कोरोना के लिये फंड की तो उन्होने अपने दस दिन का वेतन आपदा राहत कोष में दान कर दिया। उनकी प्रेरणा और आह्वाहन पर कि समस्त अधिकारी, कर्मचारी कम से कम एक दिन का अपना वेतन स्वेच्छा से जिलाधिकारी आपदा राहत कोष में दान करें। इस प्रयास का परिणाम जिलाधिकारी के 10 दिन के रूपया 60000 सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों का कुल रूपया 4,18,63,424 एकत्र हो गई। इस धन को जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित इलाहाबाद बैंक में आरटीजीएस के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करायी गयी।
आरटीजीएस के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा की गई राशि
आजमगढ़। कई बार बड़े होने की वजह से केवल आदेश देना नही होता है। बड़े होने का फर्ज आगे आकर अगुवाई करने व सबको प्रेरित करने का भी होता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है आजमगढ़ जनपद के जिलाधिकारी एन पी सिंह ने। कोरोना जैसी महामारी में सरकारी कर्मचारियों द्वारा जहां एक दिन का वेतन स्वेच्छा से दान किया जा रहा है वहीं जिलाधिकारी ने अपना दस दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया। जिलाधिकारी की प्रेरणा पर जनपद के सभी विभाग के कर्मचारियों ने आपदा की इस घड़ी में अपना एक दिन का वेतन दिया जिससे एकत्र चार करोड़ 18 लाख की राशि डीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष में शुक्रवार को जमा करके एक मिशाल प्रस्तुत की है।
साहित्यमना व संवेदनशील अधिकारी के रूप में अपनी पहचान रखने वाले जिलाधिकारी नागेंद्र प्रताप सिंह लीक से हटकर छात्रों, जरूरतमंदों की मदद के लिये जाने जाते हैं। मुसहर व वनवासियों के लिये किया गया उनका कार्य कोई भूला भी नही। जरूरतमंदों व मजलूमों के लिये हमेशा आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हे अच्छे काम करने व समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की जो ललक उनके अंदर है वह विरले ही दिखाई पड़ती है। कोरोना जैसी महामारी में जिलाधिकारी कड़ी मेंहनत कर रहे हैं, खुद आगे कदम बढ़ा कर वो सारे कार्यों की अगुवाई भी कर रहे हैं। जब बात आई कोरोना के लिये फंड की तो उन्होने अपने दस दिन का वेतन आपदा राहत कोष में दान कर दिया। उनकी प्रेरणा और आह्वाहन पर कि समस्त अधिकारी, कर्मचारी कम से कम एक दिन का अपना वेतन स्वेच्छा से जिलाधिकारी आपदा राहत कोष में दान करें। इस प्रयास का परिणाम जिलाधिकारी के 10 दिन के रूपया 60000 सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों का कुल रूपया 4,18,63,424 एकत्र हो गई। इस धन को जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित इलाहाबाद बैंक में आरटीजीएस के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करायी गयी।

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