.. आखिर हार ही गये रण वीर!

.. आखिर हार ही गये रण वीर!
आजमगढ़ के जिलाधिकारी रहे आई. ए. एस. रणवीर प्रसाद को सत्ताधारी नेताओं के दबाव में हटाने के विरोध में जबरदस्त आंदोलन
अधिवक्ता व समाजसेवी संगठन उतरे सड़क पर
सत्ताधारी नेता के दबाव मे किया गया प्रतिक्षारत
नेता के खास ठेकेदार को किया था ब्लैक लिस्टेड
आजमगढ़। एक तरफ मुलायम सिंह यादव यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर अखिलेश लूट खसोट में लगे मंत्रियों को हटाते क्यों नही हैं? दूसरी ओर उन्ही के संसदीय क्षेत्र में जिलाधिकारी के रुप में तैनात एक ईमानदार आई ए एस रणवीर प्रसाद को 6 माह के अंदर ही महज इसलिये ट्रांसफर करते हुए प्रतिक्षारत कर दिया गया कि उन्होने सपा मुखिया के  क्षेत्र में सड़क निर्माण व अन्य विकास कार्यों  में धांधली को चलने नही दिया। चर्चा के अनुसार जनपद से पहली बार मंत्री बने एक सत्ताधारी नेता के दबाव की वजह से उन्हे हटना पड़ा। आई ए एस रणवीर प्रसाद को ईमानदारी का ईनाम उन्हे किसी जिले का चार्ज मिले बिना प्रतिक्षारत होकर चुकाना पड़ा। रणवीर प्रसाद के स्थानांतरण को रद करने की मांग को लेकर आजमगढ़ में जबरदस्त आंदोलन छेड़ दिया गया है। अधिवक्ताओं व समाजसेवी संगठनों ने काम काज बंद जुलूस निकाल प्रदर्शन करते हुए उनका स्थानांतरण रद करने की मांग की है।
जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने जबसे जनपद आजमगढ़ का चार्ज लिया  तबसे उन्होने सरकारी धन के दुरुपयोग, लूट खसोट पर लगाम लगाने की भरपूर प्रयास किया। इसी क्रम में उन्होने आते ही शहर की सभी  सड़कों चाहे शारदा तिराहे से काली चौरा हो या काली चौरा से बदरका, ब्रह्मस्थान, इतना ही नही शहर से निजामबाद जाने वाली सड़क व ऊचीं गोदाम से आजमगढ़-वाराणसी मार्ग को जोड़ने वाली सड़क का  कई बार औचक निरीक्षण किया और हर हाल में मानक के अनुरुप कार्य कराने पर अड़े रहे। बताया जाता है कि उक्त सड़कों के निर्माण का जिम्मा जिन पर अरबों रुपया व्यय होना था एक ऐसे ठेकेदार पर था जो पहली बार मंत्री बने एक नेता का खासमखास है। चर्चाओं के अनुसार उक्त नेता का ही पैसा इन सड़कों के निर्माण में लग रहा है, कहा तो यह भी  जाता है कि नेता की उस ठेकेदार से हिस्सेदारी है। नेता का काम ठेके दिलवाना व प्रशासनिक अधिकारियों पर सत्ता का दबाव देकर मैनेज करना रहा है जबकि ठेकेदार द्वारा मानकहीन काम कर धन का एक बड़ा हिस्सा बंदरबाट कर दिया जाता है। यही कारण है कि अभी  कुछ ही माह पहले जब मुलायम सिंह यादव नामांकन करने आजमगढ़ आये थे उसी समय शहर की लगभग सभी  सड़कों पर निर्माण व मरम्मत कार्य हुआ था, जिस पर करोड़ों रुपया व्यय भी  हुआ था। गुणवत्ताहीन यह सड़कें चंद दिनों में ही टूट कर बिखर रही हैं। डीएम रणवीर प्रसाद उक्त सत्ताधारी नेता से मैनेज नही हुए और हालत यह हो गई कि उक्त सड़कों का निर्माण कार्य संभालने वाले ठेकेदार को उन्होने ब्लैक लिस्टेड कर शासन को भेज दिया। जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद  हर हाल में मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र में सरकारी धन के सदुपयोग पर अड़े रहे, जबकि सत्ताधारी नेता अपनी दाल गलाने पर। विकास कार्यों के अतिरिक्त समाज कल्याण, जिलापूर्ति विभाग पर भी  उनकी नजर रही। करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश करते हुए उन्होने जहां दर्जनों लोगों के  खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाई वहीं हर हाल में गरीबों को राशन व चीनी मिले इसकी भी  उन्हें चिंता रहती थी। वैसे होगा तो वही जो सत्ता के लोग चाहेंगें लेकिन अगर ठेकेदारी व अन्य सभी  कार्यों में हस्तक्षेप करना व अपने परिवार के लोगों को इसमें संलिप्त करना सत्ता में शामिल बड़े लोग छोड़ दे तो मुलायम सिंह को प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को
शायद डाटना न पड़े।

पांच माह 18 दिन  बर्दाश्त नही कर सके भ्रष्टाचारी
आजमगढ़। आई ए एस रणवीर प्रसाद ने जिलाधिकारी के रुप में आजमगढ़ का चार्ज 3 अगस्त 14 को संभाला था। उनकी ईमानदार कार्यशैली से जहां भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी घबरा रहे थे वहीं सत्ता के गलियारों में भी  इसकी चर्चा रही। भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं ने पिछले लगभग तीन माह से एक तरह से डीएम के खिलाफ मोर्चा ही खोल रखा था लेकिन चर्चा यह रही कि जनपद एक अन्य मंत्री जो समाजवादी पार्टी के बड़े व ईमानदार नेताओ में शुमार किये जाते हैं वह डीएम के ईमानदार कार्यशैली के पक्षधर थे। लोगों का कहना है कि सत्ताधारी नेता से विरोध कर पांच माह 18 दिन डीएम का टिके रहना उसी बड़े नेता की मंशा का परिणाम रहा। डीएम के अल्प कार्यकाल में हर दूसरे दिन उनके ट्रांसफर की अफवाह उड़ती रही। चाहे कुछ भी  एक ईमानदार अधिकारी का जिले से जाना आम जनता को अखर ही गया।

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