मोदी को जवाब होगी मुलायम की रैली!
मोदी को जवाब होगी मुलायम की रैली!
विकास कार्यों में आगे निकलने की होगी होड़
काशी से कम नही होगी आजमगढ़ की रौनक
आजमगढ़। वर्तमान में राजनीति को लोग अच्छी निगाहों से नही देखते लेकिन यही राजनीति अगर विकास के लिए समर्पित हो जाय तो इससे अच्छी चीज भी कोई नही है। आम आदमी के दिलों में उठने वाले इन उदगारों का नजारा इन दिनों पूर्वांचल में दिख रहा है। देश की सियासत के दो बड़े सुरमाओं की चहल कदमी ने अचानक से पूर्वांचल की राजनीति की पटकथा ही बदल दी है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी का वाराणसी से चुना जाना व तीसरे मोर्चे की ओर से प्रधानमंत्री के दावेदार रहे मुलायम सिंह यादव का आजमगढ़ से चुना जाना एक ऐसी घटना रही है जो पूर्वांचल की दशा और दिशा बदल सकती है। वर्तमान में दोनो पार्टियों में एक दूसरे से विकास के मुद्दे पर आगे निकलने की होड़ मच चुकी है। भाजपा काशी को क्योटो बनाने पर तुली है तो समाजवादी पार्टी अपने गढ़ आजमगढ़ की रौनक कहीं से भी कम नही होने देना चाहती। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गत दिनों आजमगढ़ के सांसद मुलायम सिंह लापता के पोस्टर लगाकर एक विमर्श को बढ़ा दिया तो वहीं सपा के कार्यकर्ता यह कह रहे हैं कि मोदी तीन बार वाराणसी आये लेकिन केवल भाषण देकर गये। मुलायम सांसद चुनने के बाद पहली बार आजमगढ़ आ रहे हैं और विकास के सौगातों का पिटारा लेकर आ रहे हैं। प्रदेश के कारागार मंत्री व सपा के दिग्गज नेता बलराम यादव कहते हैं कि जो नेता जी को लालटेन लेकर खोज रहे हैं वे अंधे हो गये हैं। आजमगढ़ में जो भी विकास कार्य हुए हैं उसकी एक-एक र्इंट में मुलायम सिंह की छवि दिखाई देती है। सुपर फेसलिटी हास्पीटल, जनपद आजमगढ़ का मंडल बनना, अब सठियांव चीनी मिल को नेताजी ने नवजीवन देकर उन्होने अपनी बात को चरितार्थ कर दी है कि इटावा दिल है तो आजमगढ़ धड़कन। सियासी विशेषज्ञ कहते हैं कि इन दिनों पूर्वांचल में देश के दो बड़े नेताओं की चहलकदमी ने माहौल को बदला है। काशी का विकास देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधों पर है तो आजमगढ़ का विकास विपक्ष की राजनीति की धूरी आजमगढ़ से सांसद मुलायम सिंह यादव पर है। दोनो नेताओं पर लोगों की निगाहें है। उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी संभवत: अगर कोई नया चमत्कार नही होता है तो यही दोनो पार्टियां आमने-सामने होगीं। ऐसे में इन दोनो पार्टियों के दिग्गजों की कथनी और करनी का अंतर सबके सामने होगा। सूत्रों की माने तो मुलायम की यह रैली एक तरह से समाजवादी पार्टी के अभियान का श्री गणेश होगा। विकास के मुद्दे पर भाजपा की बोलती बंद करने का समाजवादी फंडा यह उनके रणनीतिकारों की सोच है। इन रणनीतिकारों का मानना है कि जिन मुद्दों को लेकर भाजपा मैदान में है उसको उसी के हथियार से मात दिया जाय। मुलायम सिंह आगामी 6 फरवरी को आजमगढ़ आ रहे हैं उनके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी होगें। मृत हो चुकी सठियांव चीनी मिल को उसकी तीन गुनी क्षमता से दुबारा प्रारम्भ करने के साथ ही साथ छोटी बड़ी दो सौ से अधिक योजनाओं का श्री गणेश होगा। चाहे जो भी हो राजनीति के दो दिग्गजों की पूर्वांचल की ओर दौड़ ने विकास के सिलसिले की आधारशीला रख दी है।
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