अशोक भगत को पदमश्री पर गदगद है आजमगढ़
ग्राम्य विकास और राष्ट्र निर्माण में योगदान सराहनीय
8 अप्रैल को राष्ट्रपति भवन् में मिलेगा पद्मश्री
आजमगढ़। अशोक भगत को पद्मश्री सम्मान मिलने से जन्मभूमि आजमगढ़ का किशुनदासपुर और कर्मभूमि झारखण्ड दोनों ही गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उनकी लोक मंगलकारी गाथा प्रेरणा दे रही है। उनकी राष्ट्रीय पहचान जनविकास हेतु समर्पित कर्म योद्धा और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान के लिए स्थापित हुई। ग्राम्य विकास और राष्ट्र निर्माण में उनका प्रशंसनीय योगदान है। विभिन्न क्षेत्रों में अतुलनीय सेवा के लिए बुधवार को अशोक भगत को राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री पुरस्कार दिया जायेगा।
पिता राममूरत राय और माता जामवंती के इकलौते बेटे अशोक राय ने प्राथमिक शिक्षा पैतृक गांव से प्राप्त की। रसायन विज्ञान से स्नातक और राजनीति विज्ञान में परास्नातक की शिक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय से हासिल की। एनसीसी के कैडेट रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राज्य संगठन सचिव रहे। जेपी आंदोलन में आपातकाल के दौरान एक साल तक कारावास में रहे। ग्रामीण विकास वाहिनी उत्तर प्रदेश और अरविन्दो नव निर्माण प्रकल्प की स्थाना की। सर्वोदय आंदोलन में सक्रिय तथा राष्ट्रवादी विचारों के प्रबल समर्थक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सक्रिय रुप से जुड़े रहे। संघ की प्रेरणा से जनजातीय सेवा और विकास हेतु अपनी टीम के साथ विशुनपुर गुमला की सुरम्य घाटी को कर्मस्थली बनाया। गहन सर्वेक्षण अध्ययन कर आदिम जनजातियों से तादात्म्य स्थापित करने में सफल हुए। राना भगत आंदोलन को पुर्नजीवित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता,आजीविका, सामाजिक न्याय हेतु अभियान चलाया। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु धरती रक्षा वाहिनी का गठन किया। अशोक भगत ने जाने कितने कार्य किये जिनकी वजह जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक स्तर में सुधार हुआ। श्रीभगत को अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं जिनमें इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र सम्मान 1991, सामाजिक सुधार सेवा पुरस्कार 1992, भाऊ राव देवरस सम्मान 2006, स्वामी रामा ह्युमैनिटेरियन सम्मान 2008, स्वामी विवेकानन्द सम्मान 1995, झारखण्ड गौरव सम्मान 2014 प्रमुख हैं। आगामी 15, 16, 17 मई को आजमगढ़ की विभि न्न संस्थाओं, समितियों ने उनके अभि नन्दन हेतु कार्यक्रम तय किया है जिसमें उन्होने आने की सहमति दी है।

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