राहुल सांकृत्यायन, कैफी आजमी, अल्लामा शिबली नोमानी, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की गंगे जमुनी तहजीब वाली धरती आजमगढ़ में बेरोजगारी आजादी के बाद से ही यहां के लोगों को परदेस का मूंह ताकने को मजबूर करती रही है। ऐसे ही मजबूरी थी मनोज के पिता की इसी मजबूरी की वजह से उन्होने सपनों की दुनिया मुम्बई का साठ के दशक में रुख किया । इसी के साथ मनोज का बचपन भी सगड़ी तहसील के भरौली गांव व ननिहाल गोड़ारी गांव के आम के बगीचों से होता हुआ पहुंच गया था मुम्बई। मुम्बई से मनोज के शरीर को गढ़ा लेकिन उसमें आत्मा डाल दी आजमगढ़ की। यही वह कारण है जिसकी वजह से मनोज के गीतों में आजमगढ़ की तहजीब, रवायत, संस्कृति व सोच की झलक मिल जाती है। आज भी मनोज को अपने गांव की सोधीं महक खींच ही लाती है।
....उनके हर ऐब भी जमाने को हुनर लगते हैं
उत्तर प्रदेश दिवस पर आयोजित हुये विविध कार्यक्रम राष्ट्रीय बालिका दिवस बनी रंगोली, काव्यगोष्ठी का आयोजन आजमगढ़। उत्तर प्रदेश दिवस पर शनिवार को परिषदीय विद्यालयों में जहां विविध कार्यक्रमों हुये, वहीं डाइट सभागार में राष्ट्रीय बालिका दिवस को समर्पित रंगोली प्रतियोगिता व काव्यगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें जिले भर अकादमिक रिसोर्स पर्सन शामिल हुये। समारोह की अध्यक्षता डाइट प्राचार्य अमरनाथ राय ने की जबकि एडी बेसिक मनोज मिश्र व जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राजीव पाठक मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह का शुभारंभ प्राचार्य डाइट अमरनाथ राय, एडीबेसिक मनोज मिश्र व जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राजीव पाठक द्वारा दीप प्रज्जवलन से हुआ। इस अवसर पर आयोजित काव्यगोष्ठी में कई नवोदित कवियों ने जहां अपनी रचनायें सुनाई तो वहीं ऐसे भी कलाकार रहे जिन्होने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कवियत्री सरोज यादव ने सरस्वती बंदना “तार हृयय खोल जननी“ सुनाकर मंत्र मुग्ध कर दिया, इसके बाद जरा सभी की फितरत देखो, भरी दिलों में नफरत देखो सुनाकर वाह वाही लूटी, इसके अतिरिक्त उन्होने एक भोजपूरी रचना सुनाई “कवन जमाना...
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