कुपोषण से निजात में सरकार से एक कदम आगे हुआ आजमगढ़
एंड्रायड एप्स की जानकारी देते जिलाधिकारी सुहास एल वाई व अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास
जनपद के इंजीनियरों ने बनाया एंड्रायड एप्स किड-कुपोषण का दर्पण
पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना
आजमगढ़। कुपोषण से निजात के लिए चल रहे प्रदेश व्यापी मुहीम में जिलाधिकारी सुहास एल वाई एवं अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास की व्यक्तिगत रुचि ने जनपद को सरकारी प्रयासों में एक कदम आगे कर दिया है। जनपद के एनआईसी के इंजीनियरों व सरकारी डाक्टरों की मदद से एक ऐसा एंड्रायड एप्स बनाया गया है जिसमें बच्चों के कुपोषण से निजात की सारी जानकारी होगी साथ ही सम्बंधित एरिया के आशा व एएनएम का नम्बर व डिटेल भी मौजूद रहेगा।
जनपद का कार्यभार संभालने के बाद से जिलाधिकारी सुहास एल वाई व उनकी धर्मपत्नी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास ने कुपोषण के विरुद्ध एक अभि यान सा चला रखा है। जिलाधिकारी के व्यक्तिगत रुचि लेने की वजह से यह सामने आया है कि जनपद में लगभग 2600 कुपोषित बच्चे हैं। कुपोषण के खिलाफ अभियान में गत दिनों जिलाधिकारी के समक्ष यह बात उठी थी कि कई बार यह जानकारी नही हो पाती कि बच्चा कुपोषित है या नहीं या डाक्टरों के पास जाने में लापरवाही आदि की वजह से बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। सारे आक ड़ें व जानकारियां फाइलों की धूल ही फांक रहे हैं। अभियान के प्रयासों में आ रही समस्याओं के मद्देनजर जिलाधिकारी ने एनआईसी, सीएमओ, व कार्यक्रम अधिकारी को एंड्रायड एप्स डेवलप करने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के अनुपालन में गठित ने टीम ने कठिन परिश्रम करते हुए एक ऐसा एप्स बनाया है जिसका नाम कुपोषण का दर्पण रखा गया है। इसे एप्स को गूगल प्ले स्टोर में जाकर कुपोषण टाइप कर खोला जा सकता है। इस एप्स में कितने उम्र में बालिका व बालक का वजन कितना होना चाहिये दर्ज किया गया है। बच्चें को भोजन में क्या-क्या देना है। वैक्सीनेशन कब - कब होनी है सारी डिटेल मौजूद है। इसके साथ ही सम्बंधित क्षेत्र के आशा व एएनएम का नम्बर मौजूद रहेगा। जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने शुक्रवार को बताया कि इस एप्स का प्रजेंटेशन दो दिन पूर्व मुख्य सचिव के समक्ष किया गया। उनकी सहमति के बाद इसे लांच किया जा रहा है। ऐसा एप्स प्रदेश के हर जिले का विकसित करने की योजना है। उन्होने बताया कि एक बार डाउनलोड हो जाय तो इसे संचालित करने के लिए इंटरनेट की जरुरत नही है। इसमे सारे आकड़े दर्ज किये गये हैं साथ ही शशुओं के लिए आवश्यक चीजों को बाल रोग विशेषज्ञ डा. यू बी चौहान की मदद से एड किया गया है। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास ने बताया कि कई बार खान-पान की गलत आदतों व कुपोषण मध्यम वर्ग के बच्चों के अंदर भी आ जाता है। इससे निजात प्रचार-प्रसार के माध्यम से ही हो सकती है। उन्होने बताया कि मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से यह जानकारी हो जाती है कितनी मातायें व शिशु हैं व कब जन्म हुआ है। इसका इस्तेमाल कुपोषण की समाप्ति में किया जायेगा।
जनपद के इंजीनियरों ने बनाया एंड्रायड एप्स किड-कुपोषण का दर्पण
पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना
आजमगढ़। कुपोषण से निजात के लिए चल रहे प्रदेश व्यापी मुहीम में जिलाधिकारी सुहास एल वाई एवं अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास की व्यक्तिगत रुचि ने जनपद को सरकारी प्रयासों में एक कदम आगे कर दिया है। जनपद के एनआईसी के इंजीनियरों व सरकारी डाक्टरों की मदद से एक ऐसा एंड्रायड एप्स बनाया गया है जिसमें बच्चों के कुपोषण से निजात की सारी जानकारी होगी साथ ही सम्बंधित एरिया के आशा व एएनएम का नम्बर व डिटेल भी मौजूद रहेगा।
जनपद का कार्यभार संभालने के बाद से जिलाधिकारी सुहास एल वाई व उनकी धर्मपत्नी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास ने कुपोषण के विरुद्ध एक अभि यान सा चला रखा है। जिलाधिकारी के व्यक्तिगत रुचि लेने की वजह से यह सामने आया है कि जनपद में लगभग 2600 कुपोषित बच्चे हैं। कुपोषण के खिलाफ अभियान में गत दिनों जिलाधिकारी के समक्ष यह बात उठी थी कि कई बार यह जानकारी नही हो पाती कि बच्चा कुपोषित है या नहीं या डाक्टरों के पास जाने में लापरवाही आदि की वजह से बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। सारे आक ड़ें व जानकारियां फाइलों की धूल ही फांक रहे हैं। अभियान के प्रयासों में आ रही समस्याओं के मद्देनजर जिलाधिकारी ने एनआईसी, सीएमओ, व कार्यक्रम अधिकारी को एंड्रायड एप्स डेवलप करने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के अनुपालन में गठित ने टीम ने कठिन परिश्रम करते हुए एक ऐसा एप्स बनाया है जिसका नाम कुपोषण का दर्पण रखा गया है। इसे एप्स को गूगल प्ले स्टोर में जाकर कुपोषण टाइप कर खोला जा सकता है। इस एप्स में कितने उम्र में बालिका व बालक का वजन कितना होना चाहिये दर्ज किया गया है। बच्चें को भोजन में क्या-क्या देना है। वैक्सीनेशन कब - कब होनी है सारी डिटेल मौजूद है। इसके साथ ही सम्बंधित क्षेत्र के आशा व एएनएम का नम्बर मौजूद रहेगा। जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने शुक्रवार को बताया कि इस एप्स का प्रजेंटेशन दो दिन पूर्व मुख्य सचिव के समक्ष किया गया। उनकी सहमति के बाद इसे लांच किया जा रहा है। ऐसा एप्स प्रदेश के हर जिले का विकसित करने की योजना है। उन्होने बताया कि एक बार डाउनलोड हो जाय तो इसे संचालित करने के लिए इंटरनेट की जरुरत नही है। इसमे सारे आकड़े दर्ज किये गये हैं साथ ही शशुओं के लिए आवश्यक चीजों को बाल रोग विशेषज्ञ डा. यू बी चौहान की मदद से एड किया गया है। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ऋतु सुहास ने बताया कि कई बार खान-पान की गलत आदतों व कुपोषण मध्यम वर्ग के बच्चों के अंदर भी आ जाता है। इससे निजात प्रचार-प्रसार के माध्यम से ही हो सकती है। उन्होने बताया कि मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से यह जानकारी हो जाती है कितनी मातायें व शिशु हैं व कब जन्म हुआ है। इसका इस्तेमाल कुपोषण की समाप्ति में किया जायेगा।
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