राहुल सांकृत्यायन, कैफी आजमी, अल्लामा शिबली नोमानी, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की गंगे जमुनी तहजीब वाली धरती आजमगढ़ में बेरोजगारी आजादी के बाद से ही यहां के लोगों को परदेस का मूंह ताकने को मजबूर करती रही है। ऐसे ही मजबूरी थी मनोज के पिता की भी इसी मजबूरी की वजह से उन्होने सपनों की दुनिया मुम्बई का साठ के दशक में रुख किया । इसी के साथ मनोज का बचपन सगड़ी तहसील के भरौली गांव व ननिहाल गोड़ारी गांव के आम के बगीचों से होता हुआ पहुंच गया था मुम्बई। मुम्बई से मनोज के शरीर को गढ़ा लेकिन उसमें आत्मा डाल दी हिंदी पट्टी की। यही वह कारण है कि मनोज को जितना अधिकार मराठी पर है उतना ही हिंदी पर। मनोज के गीतों में उत्तर प्रदेश के शब्द, तहजीब, रवायत, संस्कृति व सोच की झलक मिल जाती है। आज भी मनोज को अपने गांव की सोधीं महक खींच ही लाती है।
मनोज ने जो कुछ पाया है वह पाया है तो अपने संघर्षों की बदौलत। न तो उनके घर का ऐसा माहोल था कि वहां शेरो शायरी की महफिल सजती रही हो और न ही ऐसी कोई पैतृक विरासत की घर में कोई कविता या गीत का शौक रखता हो। एक साधारण से किसान परिवार में जन्मे मनोज को लोग प्रतिभा का धनी मानते तो थे लेकिन उनकी प्रतिभा अपनी मंजिल तलाश नही कर पा रही थी। बचपन में आड़ी तिरछी रेखायें खींचते न जाने कब वे शब्द - शब्द जोड़कर कवितायें गढ़ने लगे इसका एहसास लोगों को तब हुआ जब उन शब्दों के अर्थ लोगों के मन को छूये और एक ताजी हवा के झोंके से नजर आये। आज भी मनोज के गीतों की यही खासियत है कि वे एकदम से नये हैं। एड फिल्मों के लिए छोटे गीतों के साथ मनोज ने अपने सफर की शुरुआत की थी। उन्हे बड़ा ब्रेक तब मिला जब उन्होने टीम इंडिया के लिए वर्ल्ड कप में उत्साहित करने वाला गीत 'दे घुमा के' लिखा। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में इंडिया सबकों घुमा के दिया भी । वर्ल्ड कप भारत का हुआ। पूरे वर्ल्ड कप के दौरान यह गीत खूब बजा था। हिंदी और मराठी के बीच की कड़ी बन चुके मनोज ने मराठी में भी कई गीत लिखकर अपनी प्रतिभा का लोहा मानने को विवश कर दिया। मनोज के मराठी गीतों को देखकर कोई भी यह नही कह सकता है कि खांटी भोजपुरिया क्षेत्र में मनोज की परवरिश हुई है। नागेश कुकनूर की फिल्म धनक में मनोज के लिखे गीत बर्लिन तक गुनगुनाये गये। कोक स्टूडियों के लिए मनोज के गीतों ने ताजगी का एहसास कराया। मनोज एक ऐसे संवेदनशील गीतकार के रुप में जाने जाते हैं जो रुह में उतरकर गीत लिखते हैं। पीकू फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गये गाने ' बेजुबान ' में इसकी झलक उभकर दिख रही है । अक्षय कुमार की फिल्म ' गब्बर ' में मनोज का लिखा गीत ' तेरी मेरी कहानी ' तो रिकार्ड ही तोड़ता जा रहा है। यू ट्यूब पर अब तक इस गीत को लगभग 32 लाख बार देखा जा चुका है। हर एक नये गीत के साथ मनोज का लेखन निखरता ही जा रहा है। शांत-शांत से दिखने वाले मनोज का गीत जब आता है तो एक हलचल सी मचा देता है। लोग बरबस ही गुनगुना उठते हैं। गुलजार को अपना आदर्श मानने वाले मनोज कदम दर कदम एक नई इबारत गढ़ते जा रहे और साथ ही साथ गांव के एक लड़के का वो सपना सच होता जा रहा जिसके लिए उसने ईश्वर से पूछा था कि आखिर तुमने मुझे धरती पर भेजा क्यूं है?
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