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" अधूरा मन "

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                                          सितम्बर महीने का आखिरी समय चल रहा था, लौटते हुये मानसून की आखिरी बरसात हो रही थी, आसमान में छाये बादल और उनसे बरस रही बूंदें रह -रह के तेज और धीमी हो रही थीं, साथ में हवा के झोंकें पूरे मौसम को सुहावना बनाये हुये थे। समीर ने अपने लैपटाप को खोला और उसकी उंगलियां की बोर्ड पर चलने लगीं जिसके साथ ही नोटबुक पर कुछ छपने लगा था। स्पाटीफाई पर तलत अजीज और लता मंगेशकर की आवाज में एक गजल ....फिर छीड़ी रात बात फूलों की ़़़़़़़़़़़़़़़़़़........ अपनी मधूर स्वर लहरियां बिखेर रहीं थी। सर्द हवा जब भी समीर के बदन से टकराती उसे बहुत अच्छा लगता। थोड़ी देर आफिस का काम निपटाने के बाद उसने अपनी मोबाइल खोल ली, जैसे ही उसने अपना व्हाट्सएप खोला, चारू के कई मैसेज पड़े हुये थे।  “तुम्हे मेरा हाल पूछना हो तो खुद ही पूछ सकते हो किसी दूसरे से पूछने की कोई जरूरत नही हैं“। चारू के इस मैसेज को पढ़ के समीर के चेहरे पर मुस्कुराहट आ चुकी थी वो समझ चुका था कि चारू का गुस्सा ना...

आस्था का ज्वार हिलोरे लेता है तो निकलती है ऐसी शिव बारात

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नगर पंचायत जीयनपुर में महा शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं मे उत्साह हाथी, घोड़े से सजी बारात में भूतों ने दिखाये करतब सगड़ी । सगड़ी तहसील के जीयनपुर नगर पंचायत में शिवरात्रि का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया, सुबह सबेरे से ही जहां शिव मंदिरों में महादेव के जलाभिषेक के लिये भीड़ उमड़ी रही तो अपराह्न निकली शिव बारात पूरे नगर का भ्रमण कर शाम तक प्राचीन शिव मंदिर पर पहुंची। बारात के दौरान विविध झााकियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जगहं-जगहं नगर वासियों और दुर्गा पूजा समितियों द्वारा बारातियों के लिये नाश्ते व जलपान की व्यवस्था रही, ढोल, नगाड़े, हाथी, घोड़े, भूत प्रेत से सजी ऐसी बारात तभी निकलती है जब आस्था का ज्वार हिलोरे लेता है।  जीयनपुर नगर पंचायत के मुख्य बाजार स्थित प्राचीन शिव मंदिर, समता नगर बाबा विश्वनाथ मंदिर, व बासदेव स्थान पर महादेव के जलाभिषेके लिये गुरूवार को सुबह से महिलाओं, कन्याओं व श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। सब ने बेलपत्र, धतूरा, भांग, अबीर इत्र आदि चढ़ाकर देवाधिदेव से आर्शीवाद मांगा। मंदिरों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। मंदिरों को परम्परागत तरीके से सजाया गया था। अ...

”प्रेमचंद का अधूरा सम्मान”

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                     पंडित नगीना स्मारक महाविद्यालय                                                  जोकहरा आजमगढ़                          (सम्बद्ध:उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन , मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज)                                                  लघु शोध प्रबंध  एम.ए. द्वितीय वर्ष तृतीय सेमेस्टर हिंदी विषय से स्नातकोत्तर उपाधि की आंशिक पूर्ति हेतु प्रस्तुत शोध रिपोर्ट   सत्र: 2024 -25                                       ''प्रेमचंद का अधूरा सम्मान”    निर्देशक         ...

खेत बेचवा

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                        खेत बेचवा बड़ा नाम था पंडित रामदीन मिश्रा का अपने गांव में वो ढाई बिगहे के काश्तकार थे। समय के साथ पंडित जी अपने उमर के चौथेपन में थे, उन्होने अपनी जिंदगी खेती बाड़ी और कथा वार्ता करके काटी थी। उनके समय में   दरवाजे पर हमेशा दो लगेन चउवा जरूर रहते थे। पंडित जी सुबह तड़के जब तक दो खांची गोबर की खाद खेत में फेक नही लेते उनको चैन नही मिलता था। यह उनका नित्य का काम था। चार दाना काली मिर्च के मुंह में  डाल कर वह दोपहर तक खेत में मेंहनत करते वो अपने साथ एक पीले रंग का झोला रखते थे, उस झोले में एक छोटी सी टिफिन में उनके ठाकुर बाबा होते थे, अगर कभी खेतों में काम करते हुये उन्हे देर हो जाती तो वहीं खेत से सटे कूंयें पर ही स्नान कर लेते और ठाकुर बाबा को नहवा कर तुलसी दल और काली मिर्च तथा एक टुकड़ा गुड़ मुंह में डाल लेते ताकि खर सेवर न हो। पंडित जी उत्तम खेती मध्यम बान वाले फिलासफी को सही मानते थे, खेती को संवारने के बाद ही पूजा पाठ और जजमानी देखते थे। पंडित जी को अपने खेतों से बहुत प्यार था वो कहा करते थ...

”धंधा“

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’मां कसम अगर भगवान कभी पैसा दिया न तो उसके दोनो बच्चों को मै पाल लूंगा’ सिगरेट का गहरा कस लेकर नाक से ढेर सारा धूंआ छोड़ते मुन्नू मिश्रा ने कहा, प्रत्युत्तर में राजेश केवल हामी भर सका था।  हरिश्चंद्र घाट से टहलते-टहलते दोनो चेत सिंह घाट चले आये थे। बनारस के घाट शाम हो या सुबह टहलने का एक अलग ही आनंद देते हैं। एक घाट से सटा दूसरा घाट कब आ जाता है, पता ही नही चलता, देशी और विदेशी सैलानियों को निहारते निहारते राह कट जाती है। दोनो चेत सिंह घाट पर बैठ गये, राजेश की उत्सुकता बड़ी जबरदस्त थी लेकिन वो कुछ पूछ नही पा रहा था। राजेश चाह रहा था कि मुन्नू डिटेल से बताये लेकिन एक अन्जाना सा खौफ व मुन्नू का शातिरपना मुन्नू को राजेश के सामने खुद को खोलने से रोके हुये था। राजेश आजमगढ़ जनपद का रहने वाला था, वो बनारस एमसीए की तैयारी करने गया था। रवींद्रपुरी कालोनी में एक कोचिंग ज्वाइन कर वो कालोनी से सटे एक मुहल्ले में कमरा लेकर रहने लगा था। कोचिंग जाने की राह पर बना बाबा कीनाराम का आश्रम उसे आकर्षित करता था। आश्रम से सटे ही बस्ती थी जिसकी टेढ़ी मेढ़ी गलियों में दो चार कदम चलने के बाद उसका रूम आ जाता था। ...

डीएम आफिस से कुंवर सिंह पार्क तक शिक्षकों का उमड़ा सैलाब

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आनलाइन हाजिरी के विरोध में सड़क पर उतरे शिक्षक जुलूस निकाला, धरना दिया और ज्ञापन सौंपा आजमगढ़। ऐसा बहुत कम होता जब सारे बुद्विजीवी एक बैनर तले आ जांय, ऐसा हुआ सोमवार को जब बुद्विजीवी कहे जाने वाले शिक्षक तबके ने सरकार एक फैसले के विरोध में एक बैनर तले आकर जबरदस्त प्रदर्शन किया और वह फैसला था आनलाइन हाजिरी का। इस मुद्दे पर शिक्षकों के लगभग सारे संगठन एक दिखे और एक स्वर में सरकार के इस फैसले का विरोध किया। आनलाइन हाजिरी के विरोध में सोमवार को जनपद के कुंवर सिंह पार्क में शिक्षकों का सैलाब उमड़ पड़ा। जिले का कोई भी ब्लाक नही बचा जिससे शिक्षक व शिक्षिकायें न पहुंची हों। प्रशासन को फोर्स लगानी पड़ी, प्रशासनिक अधिकारियों ने शिक्षक नेताओं की माइक बंद करवा दी लेकिन शिक्षकों के हौसलों को वह तोड़ नही सके, शिक्षकों ने जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।  उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक काफी दिनों से अपने विभाग के आला अधिकारियों के मनमाने फैसले से तंग चल रहे हैं, कभी चिलचिलाती गर्मी में समर कैंप लगाने का आदेश तो, कभी कांवर यात्रा में ड्युटी, तो कभी ...

लोकार्पित हुई “जमीन पर उतरी कविता“ और “माजी के मजार“

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बीसवीं शताब्दी के प्रतिनिधि लेखक हैं हरिशंकर परसाई: डा. आशीष परसाई जी के जन्मशती पर आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी आजमगढ़। जनपद के उत्तरी छोर पर स्थित श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा में बुधवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी, नई पुस्तकों के लोकार्पण सहित कई कार्यक्रम आयोजित किये गये जिसमे देश के हिंदी साहित्य के कई विद्वानों ने प्रतिभाग कि या अपने वक्तव्य दिये तथा प्रगतिशील लेखक संघ की सार्थकता को जीवंत किया | गतिशील लेखक संघ आजमगढ़ व श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा के संयुक्त तत्वाधान में बुधवार को “स्मरण - हरिशंकर परसाई” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व प्रख्यात साहित्यकार विभूति नारायण राय की अध्यक्षता में प्रारंभ हुई। संगोठी से पूर्व कवि आलोचक व गांधी पी जी कालेज मालटारी विभागाध्यक्ष डा. हसीन खान की पुस्तक “जमीन पर उतरी कविता“ व सैयद सिब्ते हसन द्वारा लिखित व डा. फिदा हुसैन द्वारा अनुदित ”माजी के मजार” का लोकार्पण देश के जाने माने साहित्यकारों जिनमें प्रमुख रूप से विभूति नारायण राय, डा. आशीष त्रिपाठी, प्रियदर्शन मालवीय, रघ...