डीएम आफिस से कुंवर सिंह पार्क तक शिक्षकों का उमड़ा सैलाब

आनलाइन हाजिरी के विरोध में सड़क पर उतरे शिक्षक

जुलूस निकाला, धरना दिया और ज्ञापन सौंपा



आजमगढ़। ऐसा बहुत कम होता जब सारे बुद्विजीवी एक बैनर तले आ जांय, ऐसा हुआ सोमवार को जब बुद्विजीवी कहे जाने वाले शिक्षक तबके ने सरकार एक फैसले के विरोध में एक बैनर तले आकर जबरदस्त प्रदर्शन किया और वह फैसला था आनलाइन हाजिरी का। इस मुद्दे पर शिक्षकों के लगभग सारे संगठन एक दिखे और एक स्वर में सरकार के इस फैसले का विरोध किया। आनलाइन हाजिरी के विरोध में सोमवार को जनपद के कुंवर सिंह पार्क में शिक्षकों का सैलाब उमड़ पड़ा। जिले का कोई भी ब्लाक नही बचा जिससे शिक्षक व शिक्षिकायें न पहुंची हों। प्रशासन को फोर्स लगानी पड़ी, प्रशासनिक अधिकारियों ने शिक्षक नेताओं की माइक बंद करवा दी लेकिन शिक्षकों के हौसलों को वह तोड़ नही सके, शिक्षकों ने जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। 


उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक काफी दिनों से अपने विभाग के आला अधिकारियों के मनमाने फैसले से तंग चल रहे हैं, कभी चिलचिलाती गर्मी में समर कैंप लगाने का आदेश तो, कभी कांवर यात्रा में ड्युटी, तो कभी मुख्यमंत्री विवाह योजना में बहुओं के श्रृंगार की ड्युटी इत्यादि।


 अब बेसिक शिक्षा विभाग की महानिदेशक कंचन वर्मा ने शिक्षकों की आनलाइन हाजिरी का फरमान जारी कर दिया, पहले तो यह प्रक्रिया 15 जुलाई से लागू होनी थी लेकिन अपने ही आदेश में तब्दीली करके उन्होने इसे 8 जुलाई से लागू कर दिया। शिक्षक महानिदेशक के इस फरमान के विरोध में शुरू से हैं, शिक्षकों का कहना है कि बेसिक का जो इन्फ्रास्ट्रक्चर है वो आनलाइन हाजिरी के अनुकूल नही है। एक बारगी तो शिक्षक कहते हैं कि हम आनलाइन हाजिरी देंगे लेकिन हमारी कुछ जायज मांगे हैं उनको मान तो लिजिये, जैसे शादी, विवाह, मुकदमा, घरेलू कार्य के लिये जैसे अन्य विभागों को 31 ईएल (इमरजेंसी लीव) मिलता है उसी तरह से हमे भी दे दिजीये, 15 हाफ सीएल (कैजुअल लीव) मिलता है वो दे दिजीये, अन्य विभागों की तरह हमें भी राज्य कर्मचारी का दर्जा दे दिजीये हम आनलाइन हाजिरी देने को तैयार हैं। शिक्षकों को कहना है कि आनलाइन हाजिरी केवल शिक्षकों पर ही क्यों लागू की जा रही है अन्य विभागों मंे क्यों नहीं लागू हो रही है। शिक्षक इस बात से आक्रोशित हैं कि यह सरकार सुधारों के नाम पर लगातार शिक्षकांे को टारगेट किये हुये है। अपनी मांगों के समर्थन में लगभग-लगभग शिक्षकों के सारे संगठन एक हो गये हैं सोमवार को पूरे प्रदेश में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने का कार्यक्रम इन संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने रखा था, इसी के तत्वाधान में आजमगढ़ जनपद में शिक्षकोें का सैलाब उमड़ पड़ा। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक के शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक कोई भी संगठन नही बचा जिससे जुड़े शिक्षक धरना स्थल कुंवर सिंह उद्यान नहीं पहुंचे। पहले यह धरना मेहता पार्क में रखा गया लेकिन शिक्षकों की भीड़ को देखते हुये इसे कुंवर सिंह पार्क में कर दिया गया। पार्क में जुटे शिक्षकों को मोर्चे के विविध पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इसी बीच प्रशासन के आला अधिकारी सभा स्थल पर पहुंच गये और धरना प्रदर्शन की अनुमति की प्रतिलिपि मांगने लगे। पदाधिकारियों ने कहा सरकार अपने खिलाफ धरना प्रदर्शन की कब अनुमति देती है, हमने सूचना दे दी थी हमारी सभा और प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। इस बाधा से शिक्षकों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया और वे नारेबाजी कर अपना विरोध प्रकट किये। मोर्च के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने अपनी माइक बंद कर दी और हजारों शिक्षकों के साथ पदयात्रा पर निकल गये। शिक्षकों की भारी भीड़े से हर कोई हतप्रभ था। शिक्षकों की लाइन खत्म होने का  नाम नही ले रही थी। कुंवर सिंह पार्क, नेहरू हाल, कलेक्ट्रेट, राजा अग्रसेन की मूर्ति तक शिक्षकों की संख्या और भीड़ कम नही हुई । अंत में शिक्षकों का जत्था जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ठहर गया वहीं मुख्य द्वार पर बैठकर जमकर नारेबाजी की। डीएम कार्यालय से कुंवर सिंह उद्यान तक तिल रखने की जगहं नही बची। सरकार के खिलाफ स्वतः स्फूर्त विरोध प्रदर्शन ने सोचने को मजबूर कर दिया कि शिक्षक आखिर क्यों इतने आक्रोशित हैं ? क्या उनकी मांग नाजायज है ? शिक्षक नेता आशुतोष सिंह कहते हैं विरोध आनलाइन हाजिरी का कहां हैं विरोध तो सरकार के दोहरे व्यवहार का है वो हमे भी अन्य कर्मचारियों की तरह सुविधा दे दे हम हाजिरी देने को तैयार हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े अंशु राय कहते हैं कि 1 मिनट की देरी और पूरे दिन का वेतन कट, यह कैसा न्याय और प्रणाली है सरकार शिक्षकों को मशीन बना देना चाहती है। अटेवा से जुड़े सतीश सिंह पटेल कहते हैं कि किसी शिक्षक की तैनाती उसके घर से 20 किलोमीटर दूर है तो किसी की पचास किलोमीटर, दूसरे जिले में तैनाती वालों को तो छोड़ ही दिजीये उस पर से न तो इनकी ट्रेन समय से चलेगी न बस कभी रेलवे क्रासिंग का फाटक बंद हो गया तो निश्चित शिक्षक को देर होगी खामियाजा वो भुगतेगा स्पष्टीकरण के नाम पर वसूली गैंग अपना काम करने लगेगी। वहीं वरिष्ठ शिक्षक नेता प्रमोद सिंह कहते हैं कि शिक्षकों को कामचोर समझने की मंशा ही सरकार के मुखिया के मन में बैठ गई है या अधिकारियों ने इस तरह का फीड बैक दिया है कि सरकार को शिक्षक चोर लग रहा है तभी इस तरह के फैसले वह ले रही है उन्होने कहा कि शिक्षक एक स्वतंत्र चेत्ता प्राणी है वह मानसिक श्रम करता है उसकी एक पैसे की कोई भी अतिरिक्त कमाई नही है वह अगर कभी लेट हो गया तो उसे सबसे बड़ा चोर कहकर ट्रीट करना कहां का न्याय है? यह सरकार ककरी के चोर को कटारी से मारना चाह रही है, अरे विभाग की कमियों को दूर कर दिजीये ले लीजिये आनलाइन हाजीरी वहीं शिक्षक नरसिंह कहते हैं कि आज के धरने में देखिये कितने शिक्षक आये हैं यह सब कहीं न कहीं पीड़ित हैं, इनके आंदोलन को देख कर तो यही लग रहा कि सरकार ने उड़ता तीर ले लिया है।  धरने को सुरेंद्र सिंह, अजय सिंह, जितेंद्र सिंह,  प्रज्ञा राय, सहित दर्जनों शिक्षक नेताओं ने संबोधित किया तथा एकजुटता बनाये रखने की अपील की साथ ही कहा कि यह लड़ाई लंबी चलेगी और हम झुकेंगे नही। 


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