बेसिक के शिक्षकों ने मारा मैदान, दिखाया आईना

यूपीटीईटी में रिकार्ड तोड़ सफलता से लौटी मुस्कान
प्राईमरी की यूपीटीईटी की परीक्षा में मनोज सिंह को मिले 149.627 पर्सेंटाइल अंक, उच्च प्राथमिक  में हरिकेश मिश्र का जलवा





आजमगढ। ऐसा शायद शिक्षा के इतिहास में पहली बार हो रहा था जब किसी शिक्षक पिता से उसका बेटा पूछ रहा था कि पिता जी, आप पास हो जायेंगे न ? आप की नौकरी बच जायेगी कि नही ? कितने नंबर का सवाल आपने सही किया है ?
अमूमन यही होता है कि बच्चे परीक्षायें देकर आते हैं तो उनके घर के अभिभावक उनसे इस तरह के सवाल पूछते हैं लेकिन न्यायालय के एक आदेश ने अपनी सेवा 15 से 20 साल तक पूरे कर चुके अध्यापकों को सकते में डाल दिया कि अब उन्हे भी अपनी योग्यता साबित करने के लिये परीक्षायें देनी पड़ेंगी नही तो उनकी नौकरी जाने का खतरा उत्पन्न हो जायेगा।  ऐसे पिता जब परीक्षायें देकर आये तो उनके बच्चों ने यही सवाल पूछे थे कि पिता जी आप पास हो जायेंगें कि नही ?
जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तर प्र्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में कार्य कर रहे लगभग पांच लाख से अधिक शिक्षकों की । माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में यह कह दिया कि हर एक शिक्षक को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। चाहे वह शिक्षक भले ही रिटायरमेंट के करीब हो। न्यायालय द्वारा कई विकल्प भी दिये गये कि या तो पात्रता परीक्षा पास करें या फिर नौकरी छोड़ दे या तो उन्हे प्रोन्नति नही मिलेगी। इस फैसले का असर पूरे देश में देखने को मिला। 
  इस एक फैसले से उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के तत्वाधान संचालित विद्यालयों में कार्य कर रहे शिक्षकों पर एक संकट गहरा गया। अपनी सेवा के दस से 15 साल पूर्ण कर चुके ऐसे शिक्षक जिन्होने टीईटी की परीक्षा नही पास की थी इस आदेश के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे थे। शिक्षकों का कथन था कि वह उम्र की ऐसे पड़ाव पर हैं जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह तैयारी करना और परीक्षा देकर अपनी योग्यता साबित करना कठिन कार्य है लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने की तूती साबित हुई। 
मरता क्या न करता बेचारा अध्यापक हार मान कर सीटीईटी व टीईटी की परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने और अपनी योग्यता साबित करने के लिये परीक्षाओं में प्रतिभाग करने का निर्णय लिया और सही समय पर आवेदन किये जाने लगे। अगर ऐसा नही करते तो उनकी नौकरी जाने का भय अलग सताने लगा उनके घरों में एक अनकही खामोशी छाने लगी। शिक्षक पिता के पढ़ाई का ध्यान उनके घर वाले रखने लगे परिवार की आजीविका जाने के संकट ने शिक्षको के परिजनों के चेहरे से मुस्कान छीन ली थी। समाज में भी तरह-तरह की बातें उठने लगी कि अध्यापक परीक्षाओं से बचना चाह रहे हैं। गुरूओं की योग्यताओं पर सवालिया निशान लगने लगे। इसी बीच अध्यापकों ने भी समाज और ऐसी नीति बनाने वाले उन नुमाइंदों को अपनी कोशिसों से आईना दिखाने लगे जो यह मान चुके थे कि यह मुश्किल कार्य अपने नौकरी के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे अध्यापकों के लिये नामुमकिन है। समाज व अदालत घर की जरूरतों से आहत अध्यापक समाज जिनकी आंखें
मोतियाबिंद से जूझ रही थी ने पढ़ना शुरू किया, कांपती हाथों ने कलम उठाया, बायोगोस्किी, चोमोस्की व बुद्धि के सिद्धांत पढ़े जाने लगे। हिंदी, पर्यावरण, गणित मनोविज्ञान की प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें जो कि आम तौर पर युवा वर्ग के हाथों में थी बेसिक के अध्यापकों के हाथों में दिखने लगी। कभी जनगणना की ड्युटी तो कभी एसआईआर, तो कभी सरकारी आदेशों के समय से पूरा करने के दबाव के बीच बेसिक के अध्यापकों ने जो कारनामा कर दिखाया है व शिक्षा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। 
यूपीटीईटी का परिणाम 26 अगस्त को जैसे ही घोषित हुआ तनाव में जी रहे अध्यापक वर्ग के चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई। यूपीटीईटी का परिणाम जो आम तौर पर 11 से 38 प्रतिशत तक रहता था व वह 72 से 80 प्रतिशत तक पहुंच गया। शायद ऐसा बेसिक के अध्यापकों के परीक्षाओं में शामिल होने और उनकी मेहनत का असर रहा कि यूपीटीईटी मे असाधारण परिणाम आया हुआ। जनपद आजमगढ़ ब्लाक अजमतगढ़ के प्राथमिक विद्यालय रौजा सैफन पट्टी में तैनात अध्यापक मनोज सिंह को प्राथमिक स्तर पर 149.267 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त हुये है जो कि प्रदेश में प्रथम स्थान जैसा प्रतीत हो रहा है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय जीयनपुर पर तैनात हरिकेश मिश्र ने 150 अंकों में 144 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त हुये। जब हरिकेश मिश्र जी बात हुई तो उन्होने बताया था कि पेपर देकर आने के बाद मैं प्रश्नों को मिलाया था तो मेरे 142 प्रश्न सही थे शायद नार्मलाइजेशन की वजह से पर्सेंटाइल 144 दिखा रहा है। वही मनोज सिंह ने बताया कि उनका सपना था कि इतना नंबर यूपीटीईटी में पाना चाहते थे कि कोई यह न सके बेसिक के अध्यापक किसी से कमजोर हैं। वहीं हरिकेश मिश्र एक शेर सुनाकर अपनी बात कहते हैं कि 
   जब भी पैदा होंगे पत्थर चलाने वाले
  आईना बनायेंगे  ये आईना बनाने वाले
  आईना टूटेगा, बिखरेगा जर्रा, जर्रा 
  फिर भी आईना बनायेंगें आईना बनाने वाले
वे कहते हैं कि शिक्षक समाज को आईना दिखाने का काम करता रहा और आगे भी करता रहेगा।

प्रदीप तिवारी की रिपोर्ट 

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