संदेश

वरासत

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                  शेखपुर यही उस गांव का नाम था। नाम के अनुसार शेख तो थे नही लेकिन गांव में हर कोई हसी खुशी रहता था। गांव के कुछ लोग बाहर भी जाकर कमाई करते थे और कुछ गांव में रहकर खेती बारी। इसी गांव में रामजियावन का भी परिवार रहता था। रामजियावन को समय से पहले ही यमराज ने याद कर लिया, घर में रह गयी उनकी बेवा बुधिया। बुधिया और रामजियावन के दो बेटे हुए, गरीबी में ही सही बुधिया ने अपने  दोनो बेटे प्रेम और उमेश को बड़े जतन से पाला। प्रेम बड़ा था, और उमेश छोटा। दोनो भाईयों में बहुत प्रेम था शायद यह उस गरीबी का प्रभाव था जो बुधिया और उसके दोनो बेटों ने झेेला था। घर का बड़ा होने के कारण प्रेम के उपर जिम्मेदारियों का बोझ अधिक था। गांव की कमाई से खर्च नही चला तो प्रेम ने परदेश की राह पकड़ी। घर में माता की देखभाल के लिए उमेश था। दिन बीतते चले गये प्रेम की भी शादी हो गयी और कुछ दिनों के बाद उमेश की भी। प्रेम परदेश गया तो जरूर लेकिन गांव से नाता बनाये रखा। छोटके उमेश का वह बराबर ध्यान रखा, प्रेम की मेहरारू मेवाती ने भी सास और अपनी देवरान फूलमती को ...

जमानत

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                वकील साहब! इसका भी कुछ भला करिये, एक सिपाही कृशकाय हो चले अधेड़ की ओर ईशारा करते हुए कहा। वकील राधेमोहन मिश्रा जो अपने दो मुवक्किलों के जमानत के कागजात तैयार कर रहे थे, अपने नाक पर उतर आये चश्मे को ठीक करते हुए सिर उठाये तो देखे कि एक व्यक्ति जो 65 की उम्र में 85 का नजर आ रहा था आशा और निराशा के मिश्रित भाव लिये वकील साहब को निहार रहा था। वकील साहब ने कहा कि अरे दीवान जी ! कुछ है भी इसके पास। दीवान जी ने कहा कि पुलिस गई तो यह अपने पड़ोसियों को गाली दे रहा था, शांति भंग की आशंका में पुलिस इसके पड़ोसियों के साथ-साथ इसको भी ले आयी, ताकी कार्रवाई दोनों पक्ष पर हो।  151 की कार्रवाई है वकील साहब देख लीजिये । वकील साहब ने पूछा है कोई है तुम्हारे साथ ? अधेड़ ने जवाब दिया नाही साहब अकेले हईं, न मेहरारू, न लइका। खाना पानी कैसे होता है ? अगला सवाल, अधेड़ ने जवाब दिया एक ठे फूस क झोपड़ी हव साहब , एक ठे भदेली और कुछ बरतन हव कहीं से कुछ मिल जाला त बना लेईला नाही तो मांग जोंग के खा लेईला, मिलल तो ठीक नाहीं सरजू मईया का पानी साहब बड़ा मीठ ल...

आतंक के गढ़ की तस्वीरें और भी हैं

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पूर्वांचल का सबसे बड़ा जिला आजमगढ़ जिसे आतंक का गढ़ भी कह देते हैं वैसे यह नाम अब जनपद के लिए नया नही रह गया है। इस नाम के साथ जीने और इस नाम के बाप दादाओं से लड़ने की आदत जो इसकी हो गयी है। आजमगढ़ के साथ यह नाम आखिर जुड़ कैसे गया ? इस जनपद की आबो हवा साहित्यिक से  आपराधिक कैसे हो गयी ? आखिर क्यों अब राहुल सांकृत्यायन, कैफी आजमी के नाम की जगह अब अबु सलेम और आतंक के रास्ते पर चलने वाले कुछ भटके नौजवानों के नाम से आजमगढ़ को जाना जाता है ? इन बातों पर विचार करें मन को बहुत तकलीफ होती है, बस यही समझ में आता है कि बुराई से अधिक बुराई की चर्चा की गति तेज होती है जनपद प्राचीन वैदिक काल से ही अपने अस्तित्व को बनाये रखा है। तमसा, सरयू और बेसो नदी की धारा ने बौद्ध धर्म को खूब पोसा। कौशल और काशी दोनो राज्यों के अंग रहे इस जनपद का जिक्र आइने अकबरी में मिलता है। देवल, दुर्वासा और दत्तात्रेय की इस धरती पर कभी अध्यात्म की त्रिवेणी बहती थी। कहा जाता है कि जौनपुर राज्य के अंतर्गत आने वाले खटवा गांव के गौतम वंशीय रियासतदार चंद्रसेन सिंह गौतम के दो पुत्र थे सागर सिंह और अभिमान सिंह। इन दोनो भाईयों म...

तीन दिनों तक योग सरिता में डूबेगा जनपद

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बाबा रामदेव के आगमन को भव्य रूप देने में जुटे साधकगण तहसील स्तर पर भी आयोजित होगें शिविर, बच्चों और महिलाओं से होंगे रूबरू आजमगढ़। योग गुरू स्वामी रामदेव आगामी 16 से 18 मई तक जनपद के अपने प्रवास के दौरान निशुल्क योग चिकित्सा व ध्यान शिविर का आयोजन करेंगें। बाबा रामदेव के कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। हरिद्वार से आये हुए साधकगणों की टीम योग से निरोग के अभियान को सफल कराने के लिये जी जान से जुटी हुई हैं। योग गुरू स्वामी रामदेव पूर्वांचल के अपने इस दौरे में योग सरिता का प्रवाह करेंगें। योग शिविर का आयोजन 16 से 18 मई तक जनपद मुख्यालय के आई टी आई ग्राउंड में सुबह 5 बजे से साढे़ सात बजे तक किया जायेगा। इस दौरान निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन भी कियाा जायेगा जिसमें पीड़ित योग सलाह व आयुर्वेद की प्राचीन परम्पराओ से असाध्य रोगों को भी ठीक कर सकेंगें। भारत स्वाभिमान न्यास, पतंजलि योग समिति, महिला पतंजलि योग समिति, पतंजलि किसान सेवा समिति, युवा भारत के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए तैयारियां जोरों पर चल ...

हरिशंकर देंगें सगड़ी की राजनीति को नया आयाम

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जनवादी कार्यों ने बनाया लोकप्रिय हरिशंकर यादव को सम्मानित करते पंडित रविदत्त एजुकेशनल समिति के सदस्य  पांच साल के विकास कार्य बनाम पांच माह ने किया चर्चित आजमगढ़। जनपद की सगड़ी तहसील के नगर पंचायत जीयनपुर के नवनिर्वाचित चेयरमैन ने सगड़ी विधानसभा के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा जाहिर करते हुए यह प्रण किया है कि अगर अवसर मिला तो सगड़ी की दसा और दिशा बदलने का पूरा प्रयास करूंगा। अल्प समय में ही अपने कार्यों से चर्चा में आये हरिशंकर यादव ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कि सगड़ी उनकी मातृभूमि और कर्मभूमि है यहां के विकास के लिए कार्य करने की उनकी दिली इच्छा है।  नगर पंचायत अध्यक्ष हरिशंकर यादव को सम्मानित करती महिला मण्डल की सदस्य नगर के सफाई बेड़े में शामिल किये गये नव वाहनों का  उद्घाटन करते हरिशंकर यादव श्री गांधी पी जी कालेज मालटारी से छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने जाने के बाद से लगातार चर्चा में रहने वाले युवा नेता हरिशंकर यादव जुझारू तेवर के नेता माने जाते हैं। जीयनपुर नगर पंचायत के चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी सहित सपा और बसपा के प्रत्याशियों को काफी पीछे धकेलते हु...

आखिर कब लेगें सुध गोगा और भीखी की कुर्बानी का ?

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1857 की क्रांति के नायक वीर कुवर सिंह की मदद के बदले मिली थी कालापानी की सजा राजनीतिज्ञों  और प्रशासन ने भुलाया वंशज कर रहे मंदिर और ऐतिहासिक सुरंग की देखभाल आजमगढ़। ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी में जकड़ी भारत माता की आजादी के लिए कई लड़ाईयां लड़ी गई। इतिहास प्रसिद्ध 1857 की क्रांति का जिक्र जब आता है तो आजमगढ़ जनपद के लोगों को खुद पर गर्व होने लगता है। इस क्रांति में जनपद के लोगों ने सीधे प्रतिभाग किया था। परंतु जिस शख्स ने आजमगढ में क्रांति की मशाल जलाई वो थे वीर कुंवर सिंह । जगदीशपुर के राजपूत जमींदार कुंवर साहब ने न केवल अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था, वरन अपनी हवेली में स्थापित बन्दूकों व गोलों के कारखाने से क्रांतिकारियों की मदद भी करते थे। चार हजार सैनिकों की सहायता से कुंवर सिंह ने आरा बिहार पर कब्जा कर लिया । अंग्रेजों की दमनात्मक कार्रवाई से कुंवर सिंह जरा सा भी विचलित नही हुए अंग्रेजों की विशाल फौज ने पहले आरा फिर जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया तथा कुंवर सिंह के कारखाने को नष्ट कर दिया। परिस्थितियों से घिरे कुंवर साहब तात्या टोपे से सम्पर्क करने के बाद लखनऊ पहुचे जहां अवध के श...

हे! तमसे तेरा उद्धार न हो

.. नागरिक अपने घर से आज यूं ही टहलते हुए निकला तो कानों में रामचरित मानस की संगीतमयी ध्वनि मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी सुनकर प्रसन्न हो गया। इस चैपाई को मन ही मन दोहराते -दोहराते नागरिक की विचार श्रृंखला रामचरित मानस, गोस्वामी तुलसीदास, रामायण के रचयिता आदि कवि वाल्मीकि से होते हुए पवि़त्र नदी तमसा तक पहुंच गयी क्योंकि यही वह नदी थी जिसके तट पर विहार कर रहे क्रौंच पक्षी के जोड़े में से बहेलिये द्वारा एक की हत्या पर आर्द्र होकर वाल्मीकि के मुख से संस्कृत का पहला श्लोक फूट पड़ा था। नागरिक मन ही मन मगन हुआ कि उसे इसी पवित्र तमसा के तट पर रहने का सौभाग्य प्राप्त है, उसने सोचा चलो आज उसी पवित्र तमसा के दर्शन क्यों न किया जाय।  टहलते कदमों से बढ़ चला नागरिक तमसा की ओर मन ही मन तमसा के रूप, लावण्य और प्रवाह को सोचते जैसे ही नागरिक तमसा के तट पर पहंुचा तो हर युग में अपने पवित्र जल से जन-जन को तारने वाली पवित्र तमसा का हाल देखकर भौचक रह गया। मल, मूत्र से बजबजाती तमसा को देख नागरिक को उबकाई आ गयी। वह सोच-सोच कर परेशान हो गया कि क्या यह वही देवी स्वरूपा तमसा है जिसके किनारे...