रंगमंच से ही लोगों तक पहुंचा सकते हैं अपनी बात



आजमगढ़। सामाजिक बुराईयों, राजनैतिक भ्रस्टाचार  आतंकवाद एवं साम्प्रदायिकता पर करारा प्रहार करते नाटकों की प्रस्तुतियों ने रंग महोत्सव के तीसरे दिन को नई उंचाई प्रदान की और यह बात सिद्ध कर दिया कि रंग मंच ही एक ऐसा माध्यम है जिससे हम अपनी बात लोगों तक पहुंचा सकते है। राष्ट्रीय साहित्य कला संस्थान उत्तर प्रदेश आजमगढ़ द्वारा आतंकवाद एवं साम्प्रदायिकता के विरूद्ध रंगान्दोलन ‘रंग महोत्सव 2014’ की तीसरी शाम जनपद के प्रसिद्ध व्यवसायी स्वर्गीय दीपचन्द्र रूंगटा को समर्पित रही।  उत्कल संगीत समाज कटक उड़ीसा द्वारा आजमगढ़ में पहली बार ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति हुई जिसे इतिश्री साहू, स्रेहा पटनायक, शीतल शीवांगी सुदर्शिनी, और किशोर कुमार डले ने किया। इन नृत्यों मेंं जहां गणेश ताण्ड़व क्लासिकल व लोकनृत्य की झलक देखने को मिली। नर्तन कला निकेतन की मदुष्मिता दास ने असमी शास्त्रीय नृत्य से लोगों को आकर्षित किया। द वूमन एण्ड चाइल्ड इंटीगेटी डवलपमेंट एसोशिएसन मणिपुर ने वहां का पारम्परिक लोक नृत्य ‘लाईहरोवा’ की मणिपुरी स्टाइल में प्रस्तुति दी
इन प्रस्तुतियों के साथ-साथ नाटकों के मंचन हो रहे थे प्रथम नाटय प्रस्तुति ‘हवालात’ की उदयन बाल एवं युवा रंगमंच सेवा संस्थान मंजिल इलाहाबाद के कलाकारों ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा लिखित नाटक हवालात का मंचन कृष्ण गोपाल कृष्ण के निर्देशन में रही। नाटक हवालात वर्तमान सामाजिक व्यवस्था व शासन-प्रशासन पर करारा व्यंग था। कलाकारों ने यह दिखाने का प्रयास किया था कि आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी  गरीब कामगारों की तकदीर नहीं बदल पायी है। गरीब, गरीब बनके रह गया है और दिन रात मेहनत कर सुबह शाम की रोटी का जुगाड़ बड़ी मुश्किल से कर पा रहा है। नाटक का सशक्त मंचन कर कलाकारों ने दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ दी। नाटक के प्रमुख पात्र मंच पर उत्कर्षित कुशवाहा, शिवम केसरवानी, नागेश पटवा, अनिल पटवा, व पियूष केसरवानी थे।
दूसरी नाटय प्रस्तुति द यूथ कल्चरल आर्टिस्ट एण्ड क्राफ्ट एसोशिएसन सिंहजमाई बाजार द्वारा नाटक ‘कंस बोधा’ का मंचन ओ शान्ता के निर्देशन में किया गया। नाटक कृष्ण के जन्म से पूर्व हुई भविष्यवाणी पर केन्द्रित था। जिसमें यह कहा गया था कि देवकी का आठवां पुत्र कंस की मौत का कारण बनेगा। जिससे घबराकर कंस ने अपनी मुंहबोली बहन देवकी व बासुदेव को जेल में बंद कर दिया। नाटक में एन. इबोहाल सिंह ने कंस, ओ बसन्ता ने बासुदेव, के जूरिस ने कष्ण, एन. छाबा ने बलराम, ओ. शान्ता ने अकरूर, के विमोलता देवी ने देवकी, वी.जमुना देवी ने यशोदा, एच. एंजालिया देवी ने प्रमुख भूमिका निभायी।
तीसरे दिन की तीसरी नाटय प्रस्तुति कविता थियेटर जलाराम गुजरात द्वारा योगेश मेहता के निर्देशन में ‘आखिर कब तक’ थी। नाटक का कथासार कुछ यूं था कि आज हमारे महान भारत में धर्म, कानून, और राजनीतिक भ्रष्टाचार इस कदर फैला है कि आतंकवाद और सामप्रदायिकता जैसे काले नाग फन फैलाये देशा को डंस रहे हैंं। हम मूकदर्शक बन सिर्फ चीख और चिल्ला रहे हैं। अब समय है रंगमंच के माध्यम से देश को जगाने का। प्रमुख पात्र मौलवी विराग वरोर, फादर माधव कक्कड़, नेता एक भावना, नेता दो राजेन्द्र सिंह, पंडित योगेश मेहता थे।


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