जिलाधिकारी बड़े टाइट हैं, संभल के रिपोर्ट देना


क्षेत्र पंचायत सठियांव में व्याप्त भ्रष्टाचार का मामला
जांच पर ही उठने लगी है उंगली
आजमगढ़। जनपद के जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद के बहुत सख्त होने की भाषा तो जनपद के हर निवासी और अधिकारी कर्मचारी की जुबान पर है, परन्तु खेद का विषय यह है कि जिलाधिकारी के विकास कार्यों और भ्रष्टाचार के प्रति सक्रिय  होने के बावजूद तीन माह पूर्व दिये गये प्रार्थना पत्रों पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। सम्बन्धित अधिकारी कर्मचारी प्रार्थना पत्रों को दबाकर रखे हुए हैं और भ्रष्टाचारी लोगों से सौदा तय कर रहे हैं। यह हाल उस जिले का है जिसके  समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव हैं सत्ताधारी नेताओं के आगे एक ईमानदार अधिकारी की जो उनके
जनपद के पूर्वांचल में स्थिति रेशमी नगरी मुबारकपुर जो क्षेत्र पंचायत सठियांव के अन्तर्गत पड़ता है, में चतुर्दिक भ्रस्टाचार  का बोलबाला है। चाहे मुबारकपुर क्षेत्र की बुनकर समितियों का मामला हो, चाहे क्षेत्र में छात्रवृत्ति वितरण का मामला हो या क्षेत्र में विकास कार्यों का मामला हो या क्षेत्र में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाये शिक्षकों का मामला हो।
स्वच्छता अभियान का शुभारम्भ  22 सितम्बर को अमिलो गांव में गये जिलाधिकारी को क्षेत्र पंचायत सठियांव के ग्रामपंचायत सोनपार, गूजरपार, सिकन्दरपुर, नैठी, बिन्दमठिया, गांवों की शिकायत क्षेत्रवासियों ने लिखित रूप से सम्पूर्ण विवरण सहित जिलाधिकारी को दिया और यह मांग किया कि इसका पता किसी को न चले और जांच पूरी हो जाय। अनियमितता की जांच तो हुई नहीं, बल्कि सम्बन्धित वि•ाागों के अधिकारियों ने जिनकी शिकायत हुई थी, उन्हें अवश्य अवगत करा दिया और लग•ाग तीन माह बीतने को है अभी  तक जिलाधिकारी को किसी ने जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी। उल्टे ही सम्बन्धित अधिकारी शिकायतकर्ताओं से कहते नहीं चूकते कि जिलाधिकारी बहुत टाइट है, संभल करके रिपोर्ट देनी है। उल्लेखनीय है कि सिकन्दरपुर गांव में बने महिला और पुरूष शौचालयों को एक दबंग व्यक्ति ने ध्वस्त कराकर उस पर अपनी गौशाला बना लिया और उसमें लगे इण्डिया मार्क-2 हैण्डपम्प को अपने दरवाजे पर लगवा लिया। उक्त प्रकरण की जांच सठियांव के खण्ड विकास अधिकारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं का बड़ा दबाव है। मैं इसमें क्या लिखूं क्या न लिखूं समझ से परे की बात है। उसी गांव में बने सामुदायिक मिलन केन्द्र के समरसिबल पम्प को एक गांव के जिम्मेदार ने जिसको उसकी रक्षा का जिम्मा दिया गया है, निकलवाकर अपने दरवाजे पर लगा लिया। यही नहीं उक्त सामुदायिक मिलन केन्द्र में लगाने के लिए गयी टाइल्स उक्त सामुदायिक केन्द्र की शोभा  बढ़ाने के बजाय एक व्यक्ति के लैट्रिन हाउस और बाथरूम की शोभा  बढ़ा रही है। बिन्द मठिया ग्राम के पूर्व और वर्तमान ग्राम पंचायत अध्यक्षों द्वारा 7 वर्ष से किसी भी  छात्र को छात्रवृत्ति वितरित नहीं की गयी। इसी प्रकार मामला कुछ सिकन्दरपुर ग्राम पंचायत का भी  है। इसकी जांच क्षेत्रीय खण्ड शिक्षा अधिकारी कर रहे हैं। क्षेत्र के एक विद्यालय में एक शिक्षक अमान्य शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर कार्यरत हैें। उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक जो कि मंत्री थे, आज इन्हीं प्रकरणों में जेल की हवा खा रहे हैं और उक्त अध्यापक को शिक्षा वि•ााग पूरा वेतन दे रहा है। ग्रामीणों ने बार-बार शिकायत किया लेकिन पैसे के बल पर उक्त अध्यापक वेतन ले रहा है। यही नहीं क्षेत्र के कतिपय शिक्षक उर्दू अध्यापक के नाम पर प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। कई को तो एक अक्षर उर्दू का नहीं आता और कई को हिन्दी में अपना हस्ताक्षर करने •ाी नहीं आता, परन्तु वे पूरा वेतन वि•ााग की मर्जी से और मिली भगत से ले रहे हैं। रेशमी नगरी के नाम से विख्यात मुबारकपुर और आस पास में बनायी गयी बुनकर सहकारी समितियां जो सरकार से करोड़ों-करोड़ रूपये अनुदान के रूप में ले रही हैं, उनका भी  लाभ  किसी भी  बुनकर को नहीं मिल रहा है। इसकी जांच जब प्रारम्भ  हो जाती है भ्रष्टाचार में लिप्त समितियों के सम्पति आपस में चन्दा जुटाकर जांचकर्ताओं को भारी रकम से तोप ढक देते हैं और प्रकरण की जांच उनकी गम्रभीर  निद्रा में समा जाती है। उपरोक्त अनियमितताओं की जांच कर रहे अधिकारी जिलाधिकारी के टाइट होने का बहाना तो जरूर बना दे रहे हैं लेकिन तीन-तीन माह बीतने जा रहे हैं परन्तु दिये गये प्रार्थना पत्रों पर कोई जांच की रिपोर्ट जिलाधिकारी को नहीं सौंपा। आखिर इस तरह की अनियमितताओं के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं, या क्षेत्रीय जनता जिम्मेदार हैं, इसका निर्धारण तो जिलाधिकारी को ही करना है। उनकी सक्रियता का तनिक भी  अहसास ये जांच अधिकारी करते तो भ्रस्टचार में काफी कमी आ जाती।




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