बेड आठ, चौंतीस की नसबंदी बेड कम पड़ने पर जमीन पर लिटाया विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक की घटना की पुनरावृत्ति होते-होते बची
बेड आठ, चौंतीस की नसबंदी
बेड कम पड़ने पर जमीन पर लिटाया
विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक की घटना की पुनरावृत्ति होते-होते बची
आजमगढ़। आजमगढ़ जनपद को समाजवादी पार्टी की सरकार का सबसे खास जनपद माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर विकास की नदियां बह रही हैं। जनहित के बड़े-बड़े कार्य हो रहे हैं। लेकिन यहां का जनमानस स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर आज भी सरकार की ओर मुंह ताकने के लिए विवश है। जनपद में तैनात उपरोक्त तीनों विभागों के अधिकारियों को न तो सरकार की गरिमा का ध्यान है न ही इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद का। नये साल की शुरुआत के साथ गत दो जनवरी को जनपद का स्वास्थ्य महकमा खुद को शर्मसार करता नजर आया। पूरे दिन की बरसात और कड़ाके की ठण्ड में नसबंदी कराने आयी महिला शिविरार्थियों को बेड तक मुहैया नहीं कराया गया। अस्पताल के फर्श पर एक दरी बिछा कर उस पर सफेद चादर डालकर महिलाओं को लिटा दिया गया। यह तो ईश्वर की कृपा ही रही वरन छत्तीसगढ़ के विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक में हुई घटना की पुनरावृत्ति की पूरी संभावना डाक्टरों ने उपलब्ध करा दी। खुद एसी में गर्म रातें बिताने वाले डाक्टरों व अधिकारियों को इन मरीजों की पीड़ा जरा सी भी नजर नहीं आयी। डाक्टरों पर तो जनपद के सपा सरकार के नेताओं, यहां के मंत्रियों, विधायकों का कोई असर नजर नहीं आता। बीते दिनों एक डाक्टर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए घूस मांग रहा था। जब सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने उसे मना किया तो वह उनसे उलझ पड़ा। इसी से ही सपा के नेताओं का कद कितना रह गया है इसकी जानकारी मिलती है।
जनपद राहुल सांकृत्यायन मंडलीय महिला चिकित्सालय में प्रत्येक मंगलवार व शुक्रवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया जाता है। 2 जनवरी को भी ऐसे ही एक शिविर का आयोजन था। ऐसे शिविरों में दूर दराज की आशा कार्यकत्री महिलाओं को लेकर चिकित्सालय आती है। मंडलीय चिकित्सालय में कुल बेडों की संख्या 100 है जिसमें से महज 8 नसबंदी के लिए आरक्षित हैं। शुक्रवार को डाक्टर बेड न होने के बावजूद लगभग 34 महिलाओं का आपरेशन कर दिया। जब बेड की समस्या आई तो आपरेशन की गई महिलाओं को अस्पताल के एक बरामदें में जमीन पर दरी डाल उस पर सफेद चादर डालकर लेटा गया। कड़कड़ाती सर्दी में पीड़ित महिलायें ठिठुरने के विवश रहीं। इस बाबत महिला सीएमएस का कहना था कि उन्होने सीएमओं से इस समस्या के बाबत अवगत करा दिया था लेकिन उन्होने यह कहते हुए आपरेशन करने की अनुमति दी कि आशा बहुयें दूर दराज क्षेत्र से मरीज लेकर आती हैं उनका नुकसान नही होना चाहिये। लक्ष्मी पत्नी हरेंद्र, अनीता दवी पत्नी चंदे्रश निवासी समेंदा, रीता पत्नी जोगेश्वर प्रजापति, मनीशा, भानमती, रामू, दुर्गावती देवी, सरिता, आशा देवी, नीतू, रंजना सिंह सहित 34 महिलाओं की नसबंदी की गयी। इन महिलाओं के रुकने की व्यवस्था के बाबत सीएमएस अमिता अग्रवाल ने बताया कि प्रति मरीज 20 रुपये का मद उपलब्ध कराया जाता है। अब बताइए इतने ही रकम में क्या किया जाय। यह तो ईश्वर की कृपा ही रही कि कोई हादसा नही हुआ लेकिन चिकित्सकों व स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही खुलकर सामने आ गई। कें द्र सरकार के दिशा-निदेर्शों के मुताबिक एक मेडिकल टीम एक दिन में 30 से ज्यादा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नहीं कर सकती। लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर इस कदर आपा धापी रही कि 34 आपरेशन कर दिये गये। मजे की बात यह है कि घोर लापरवाही करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय महकमा लीपा पोती करने मेें लगा है।
बेड कम पड़ने पर जमीन पर लिटाया
विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक की घटना की पुनरावृत्ति होते-होते बची
आजमगढ़। आजमगढ़ जनपद को समाजवादी पार्टी की सरकार का सबसे खास जनपद माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर विकास की नदियां बह रही हैं। जनहित के बड़े-बड़े कार्य हो रहे हैं। लेकिन यहां का जनमानस स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर आज भी सरकार की ओर मुंह ताकने के लिए विवश है। जनपद में तैनात उपरोक्त तीनों विभागों के अधिकारियों को न तो सरकार की गरिमा का ध्यान है न ही इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद का। नये साल की शुरुआत के साथ गत दो जनवरी को जनपद का स्वास्थ्य महकमा खुद को शर्मसार करता नजर आया। पूरे दिन की बरसात और कड़ाके की ठण्ड में नसबंदी कराने आयी महिला शिविरार्थियों को बेड तक मुहैया नहीं कराया गया। अस्पताल के फर्श पर एक दरी बिछा कर उस पर सफेद चादर डालकर महिलाओं को लिटा दिया गया। यह तो ईश्वर की कृपा ही रही वरन छत्तीसगढ़ के विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक में हुई घटना की पुनरावृत्ति की पूरी संभावना डाक्टरों ने उपलब्ध करा दी। खुद एसी में गर्म रातें बिताने वाले डाक्टरों व अधिकारियों को इन मरीजों की पीड़ा जरा सी भी नजर नहीं आयी। डाक्टरों पर तो जनपद के सपा सरकार के नेताओं, यहां के मंत्रियों, विधायकों का कोई असर नजर नहीं आता। बीते दिनों एक डाक्टर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए घूस मांग रहा था। जब सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने उसे मना किया तो वह उनसे उलझ पड़ा। इसी से ही सपा के नेताओं का कद कितना रह गया है इसकी जानकारी मिलती है।
जनपद राहुल सांकृत्यायन मंडलीय महिला चिकित्सालय में प्रत्येक मंगलवार व शुक्रवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया जाता है। 2 जनवरी को भी ऐसे ही एक शिविर का आयोजन था। ऐसे शिविरों में दूर दराज की आशा कार्यकत्री महिलाओं को लेकर चिकित्सालय आती है। मंडलीय चिकित्सालय में कुल बेडों की संख्या 100 है जिसमें से महज 8 नसबंदी के लिए आरक्षित हैं। शुक्रवार को डाक्टर बेड न होने के बावजूद लगभग 34 महिलाओं का आपरेशन कर दिया। जब बेड की समस्या आई तो आपरेशन की गई महिलाओं को अस्पताल के एक बरामदें में जमीन पर दरी डाल उस पर सफेद चादर डालकर लेटा गया। कड़कड़ाती सर्दी में पीड़ित महिलायें ठिठुरने के विवश रहीं। इस बाबत महिला सीएमएस का कहना था कि उन्होने सीएमओं से इस समस्या के बाबत अवगत करा दिया था लेकिन उन्होने यह कहते हुए आपरेशन करने की अनुमति दी कि आशा बहुयें दूर दराज क्षेत्र से मरीज लेकर आती हैं उनका नुकसान नही होना चाहिये। लक्ष्मी पत्नी हरेंद्र, अनीता दवी पत्नी चंदे्रश निवासी समेंदा, रीता पत्नी जोगेश्वर प्रजापति, मनीशा, भानमती, रामू, दुर्गावती देवी, सरिता, आशा देवी, नीतू, रंजना सिंह सहित 34 महिलाओं की नसबंदी की गयी। इन महिलाओं के रुकने की व्यवस्था के बाबत सीएमएस अमिता अग्रवाल ने बताया कि प्रति मरीज 20 रुपये का मद उपलब्ध कराया जाता है। अब बताइए इतने ही रकम में क्या किया जाय। यह तो ईश्वर की कृपा ही रही कि कोई हादसा नही हुआ लेकिन चिकित्सकों व स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही खुलकर सामने आ गई। कें द्र सरकार के दिशा-निदेर्शों के मुताबिक एक मेडिकल टीम एक दिन में 30 से ज्यादा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नहीं कर सकती। लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर इस कदर आपा धापी रही कि 34 आपरेशन कर दिये गये। मजे की बात यह है कि घोर लापरवाही करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय महकमा लीपा पोती करने मेें लगा है।
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