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जिलाधिकारी बड़े टाइट हैं, संभल के रिपोर्ट देना

क्षेत्र पंचायत सठियांव में व्याप्त भ्रष्टाचार का मामला जांच पर ही उठने लगी है उंगली आजमगढ़। जनपद के जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद के बहुत सख्त होने की भाषा तो जनपद के हर निवासी और अधिकारी कर्मचारी की जुबान पर है, परन्तु खेद का विषय यह है कि जिलाधिकारी के विकास कार्यों और भ्रष्टाचार के प्रति सक्रिय  होने के बावजूद तीन माह पूर्व दिये गये प्रार्थना पत्रों पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। सम्बन्धित अधिकारी कर्मचारी प्रार्थना पत्रों को दबाकर रखे हुए हैं और भ्रष्टाचारी लोगों से सौदा तय कर रहे हैं। यह हाल उस जिले का है जिसके  समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव हैं सत्ताधारी नेताओं के आगे एक ईमानदार अधिकारी की जो उनके जनपद के पूर्वांचल में स्थिति रेशमी नगरी मुबारकपुर जो क्षेत्र पंचायत सठियांव के अन्तर्गत पड़ता है, में चतुर्दिक भ्रस्टाचार  का बोलबाला है। चाहे मुबारकपुर क्षेत्र की बुनकर समितियों का मामला हो, चाहे क्षेत्र में छात्रवृत्ति वितरण का मामला हो या क्षेत्र में विकास कार्यों का मामला हो या क्षेत्र में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाये शिक्षकों का म...

बेड आठ, चौंतीस की नसबंदी बेड कम पड़ने पर जमीन पर लिटाया विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक की घटना की पुनरावृत्ति होते-होते बची

बेड आठ, चौंतीस की नसबंदी बेड कम पड़ने पर जमीन पर लिटाया विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक की घटना की पुनरावृत्ति होते-होते बची आजमगढ़। आजमगढ़ जनपद को समाजवादी पार्टी की सरकार का सबसे खास जनपद माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर विकास की नदियां बह रही हैं। जनहित के बड़े-बड़े कार्य हो रहे हैं। लेकिन यहां का जनमानस स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर आज भी  सरकार की ओर मुंह ताकने के लिए विवश है। जनपद में तैनात उपरोक्त तीनों विभागों के अधिकारियों को न तो सरकार की गरिमा का ध्यान है न ही इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद का। नये साल की शुरुआत के साथ गत दो जनवरी को जनपद का स्वास्थ्य महकमा खुद को शर्मसार करता नजर आया। पूरे दिन की बरसात और कड़ाके की ठण्ड में नसबंदी कराने आयी महिला शिविरार्थियों को बेड तक मुहैया नहीं कराया गया। अस्पताल के फर्श पर एक दरी बिछा कर उस पर सफेद चादर डालकर महिलाओं को लिटा दिया गया। यह तो ईश्वर की कृपा ही रही वरन छत्तीसगढ़ के विलासपुर जनपद के तखतपुर ब्लाक में हुई घटना की पुनरावृत्ति की पूरी संभावना डाक्टरों ने उपलब्ध करा दी। खुद एसी म...

रंगमंच से ही लोगों तक पहुंचा सकते हैं अपनी बात

आजमगढ़। सामाजिक बुराईयों, राजनैतिक भ्रस्टाचार  आतंकवाद एवं साम्प्रदायिकता पर करारा प्रहार करते नाटकों की प्रस्तुतियों ने रंग महोत्सव के तीसरे दिन को नई उंचाई प्रदान की और यह बात सिद्ध कर दिया कि रंग मंच ही एक ऐसा माध्यम है जिससे हम अपनी बात लोगों तक पहुंचा सकते है। राष्ट्रीय साहित्य कला संस्थान उत्तर प्रदेश आजमगढ़ द्वारा आतंकवाद एवं साम्प्रदायिकता के विरूद्ध रंगान्दोलन ‘रंग महोत्सव 2014’ की तीसरी शाम जनपद के प्रसिद्ध व्यवसायी स्वर्गीय दीपचन्द्र रूंगटा को समर्पित रही।  उत्कल संगीत समाज कटक उड़ीसा द्वारा आजमगढ़ में पहली बार ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति हुई जिसे इतिश्री साहू, स्रेहा पटनायक, शीतल शीवांगी सुदर्शिनी, और किशोर कुमार डले ने किया। इन नृत्यों मेंं जहां गणेश ताण्ड़व क्लासिकल व लोकनृत्य की झलक देखने को मिली। नर्तन कला निकेतन की मदुष्मिता दास ने असमी शास्त्रीय नृत्य से लोगों को आकर्षित किया। द वूमन एण्ड चाइल्ड इंटीगेटी डवलपमेंट एसोशिएसन मणिपुर ने वहां का पारम्परिक लोक नृत्य ‘लाईहरोवा’ की मणिपुरी स्टाइल में प्रस्तुति दी इन प्रस्तुतियों के साथ-साथ नाटकों के मंचन हो रहे थे प्...

परिवहन विभाग के रहमोकरम पर चल रहा 'कटिंग' का धंधा

परिवहन विभाग के रहमो करम पर चल  रहा 'कटिंग' का धंधा  वसूली के अड्डे बने ढाबे   आजमगढ़। वाराणसी से गोरखपुर वाया आजमगढ़ का सड़क मार्ग कमाई का एक बडे धंधे के रुप में तब्दील हो चुका है। इस राजमार्ग पर स्थित किसी भी  बाजार चाहे व छोटी हो या बड़ी के बाहर सड़कों पर कं क्रीट के ढेर पर भले लोगों की नजर न जाय मगर यह उपज है परिवहन विभाग की अवैध वसूली का। जनपद में भी  ऐसी दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही हैं जो कटिंग के इस धंधे में लिप्त होकर अवैध मुनाफा को परवान चढ़ा रही हैं।  बडेÞ पैमाने पर खेले जाने वाले इस खेल की शुरुआत प्रदेश के सोनांचल से शुरु हो जाती है। यहां ट्रकों पर मानक से ज्यादा कंक्रीट ट्रक डाईवर लोड करा लेते हैं। गिट्यिों से लदी ये ओवरलोड ट्रकें बड़े पैमाने पर सोन नदी व मारकुंडी पहाड़ी के इलाकों से गोरखपुर के लिए रवाना होती हैं। वाराणसी से गोरखपुर वाया आजमगढ़ के रास्ते भर ये ओवरलोड ट्रकें सड़कों पर कुछ खास दुकानों पर अपनी ट्रकें रोकते हैं और तुरत- फुरत ये अतिरिक्त गिट्यिों का सौदा करते हैं दुकानदार लगभग आधी कीमत पर गिट्यिों को खरीद लेता है। ट्...

jai sri krishna

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उर्दू के जाने माने लोकप्रिय शायर मुनव्वर राणा को वर्ष 2014 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है.

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उर्दू के जाने माने लोकप्रिय शायर मुनव्वर राणा को वर्ष 2014 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है. ये पुरस्कार कई भाषाओं में रचनाओं को दिए जाते हैं और इस वर्ष हिंदी के रचनाकार रमेश चंद्र शाह को उनके उपन्यास विनायक के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा. राणा कई मुद्दों पर अपने शेरों के लिए प्रसिद्ध हैं. उनकी मां पर लिखी गई नज़्में बेहद लोकप्रिय रही हैं. राणा को उनके काव्य संग्रह शाहदाबा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा. 22 भाषाओं में पुरस्कार अंग्रेज़ी में ये पुरस्कार इस वर्ष आदिल जस्सावाला को दिया जाएगा उनके कविता संग्रह ट्राईंग टू से गुडबाय के लिए.  मणिपुरी और संस्कृत में पुरस्कार बाद में दिए जाएँगे. समरोह नौ मार्च को अगले साल होगा.

लबो पर उसके कभी बददुआ नहीं होती

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लबो पर उसके कभी बददुआ नहीं होती बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है ए अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया मेरी ख्वाहिश* है की मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊँ माँ से इस तरह लिपटूँ कि बच्चा हो जाऊँ माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कराती है