सोना

         "सोना“

"जिंदगी से कीमती सोना होता है” 

यह बात मैं पूरे होशो हवास में कह रहा हूं कि जिंदगी से कीमती सोना होता अब आप कहेंगें कि अजीब अहमक है, तो श्रीमान मैं बिल्कुल सही कह रहा हूं कि जिंदगी से कीमती सोना होता है। अब आप कहेंगें कि भाई चलो कह रहे हो तो मान ही लेते हैं मगर इस बात के पीछे तुम्हारी सोच क्या है ? तर्क क्या ? सबूत क्या है ? तो नीचे दी गई एक बिल्कुल सच्ची कहानी पढ़िये आपको जरूर यकीन हो जायेगा कि जिंदगी से कीमती सोना होता है। 

एक लड़का था नाम था उसका समीर, सीधा, साधा सच्चा, परिश्रमी, ईमानदार बस एक ही अवगुण था कि वह बहुत ज्यादा इमोशनल था, उससे किसी का दुख बर्दाश्त नही होता था तो वह सबके सुख-दुख का साथी था। पढ़ाई लिखाई में वह ठीक -ठाक था सो समय से नौकरी लग गई, पैसे की कोई कमी रह नही गई। उसकी आफिस में एक लड़की से उसकी दोस्ती हो गई लड़की अभी ट्रेनी थी, जुगत लगाकर कर वह प्रशिक्षु बन तो गई थी लेकिन उसकी नौकरी तभी होगी जब वह अपने प्रशिक्षण के एक वर्ष के बाद होने वाली परीक्षा को पास करेगी। मानसी देखने में सुंदर थी, चेहरा आकर्षक, नैन नक्श तीखे पहली नजर में वो किसी को भी पसंद आ सकती थी। मानसी अपनी नौकरी को लेकर बहुत तनाव में थी, एक दिन लंच टाइम में उसके चेहरा बुझा-बुझा देख समीर ने उससे पूछा मानसी, बात क्या है तुम कई दिनों से परेशान लग रही हो चेहरे पर तुम्हारे मुस्कान नही है, बता सकती हो तो बता दो, समीर ने बड़े ही आत्मीयता से पूछा तो मानसी खुद को रोक नही सकी मानसी के आंखों के कोर भींग गये। वह बोली समीर क्या तुम मेेरे घर आ सकते हो ? समीर ने कहा क्यों नही ? उस दिन शाम को 6 बजे के आस-पास समीर मानसी के घर पहुंचा। घर में मानसी की मां ही थी पिता का देहांत हो चुका था, एक भाई था जो अभी पढ़ाई कर रहा था। चाय नाश्ते की औपचारिकता के बाद मानसी की मां किचन में व्यस्त हो गई, मानसी और समीर घर के बरामदे के बाहर छोटी सी खुली जगह में बैठकर बातें करने लगें। मानसी ने कहा कि समीर मैं तुम्हे नही बता सकती मैंने यह नौकरी पाने के लिये कितने सेक्रीफाइस किये हैं। बस मेरी नौकरी बचा लो, समीर बोला यार, मैं क्या कर सकता हूं ? मानसी ने कहा कि मैं इस जाब प्रोफाइल के बारे में कुछ भी नही जानती और मुझे लगता है कि एक वर्ष बाद होने वाले एग्जाम में मैं फेल हो जाऊंगी और मुझे जाब से बाहर होना पड़ेगा। इतना कह कर मानसी फफक पड़ी, समीर सोच में पड़ गया कि आखिर मानसी ऐसा क्यों कह रही है, उसकी नौकरी का राज क्या है ? किसकी कृपादृष्टि से नौकरी पाई है और उसे नौकरी चले जाने का इतना भय क्यों है, सेवा में आने के बाद में ऐसी परीक्षायें तो एक सामान्य सी परीक्षा होती है। समीर ने कुछ बोला तो नही लेकिन मानसी के आसुंओं ने उसे बेचैन कर दिया था। अगले दिन आफिस में मानसी समीर को आशा भरी नजरों से निहार रही थी, लंच टाइम में आज पहली बार दोनो ने अपना लंच शेयर किया था। मानसी आलू के पराठे लेकर आई थी जो कि समीर का फेवरेट डिश था। खैर दोनों में निकटता दोस्ती की हद तक बढ़ चुकी थी, समीर अब मानसी को ज्यादा समय देने लगा था । एक साल बाद होने वाली परीक्षा की तैयारी के लिये समीर जितना हो सकता था उतना मानसी की मदद कर रहा था। बुक, कापियां नोट्स के ढेर लग चुके थे। समीर इस दौरान अपने कई इंपार्टेंट कामों को छोड़ता चला जा रहा था, वह सोच रखा था कि इस साल वह अपनी यह नौकरी छोड़ ऊंचे जाब प्रोफाइल में चला जायेगा लेकिन मानसी से इमोशनल टच की वजह से अब वह दिन रात उसके ही बारे में सोचता रहता था। मानसी की मां की तरफ से कोई रोक टोक नही था सो समीर कई बार मानसी के घर से ही खाना खाकर लौटता था। समीर ने बहुत मेहनत की और मानसी को इस लायक बना दिया कि वह परीक्षा पास हो सकती थी। मानसी की परीक्षा के एक सप्ताह बचे थे, समीर का प्रमोशन के साथ तबादले का आदेश हो गया। यह खबर जैसे ही मानसी ने सुना उसे चक्कर सा आ गया। वह रोने लगी उसे लगा कि समीर उसे छोड़कर चला जायेगा। शाम को समीर जब उसके घर पहुंचा तो मानसी ने रो-रो कर अपना बुरा हाल कर रखा था, वह बेतहाशा समीर से लिपट गई। बहुत देर तक रोती रही, समीर की आंख भी भर चुकी थी, मुंह से आवाज नही निकल रही थी। समीर ने कहा यार, मानसी मैं नौकरी छोड़ना पसंद करूंगा लेकिन तुम्हे छोड़ना नही। काफी देर बाद दोनो शांत हुये, साथ जीने और मरने की कसमें खाने लगें। दोस्ती प्रगाढ़ हो चुकी थी, समीर के मन में ख्वाब पलने लगे थे। मानसी का इतना करीब आने को वह मानसी की तरफ हां ही मान चुका था। धीरे-धीरे परीक्षा की तारीख निकट आती जा रही थी, मानसी की परीक्षा के ठीक एक दिन पहले विभागीय आदेश न मानने के कारण समीर को शो काज नोटिस जारी करते हुये निलम्बित कर दिया गया। समीर बस यह सोच कर कि मानसी को पता लगेगा तो वह अपसेट हो जायेगी उसने मानसी से यह बात शेयर नही की। परीक्षा केंद्र के बाहर बैठकर समीर, मानसी के परीक्षा देकर लौटने का इंतजार करता रहा। मानसी परीक्षा देकर जब बाहर निकली तो वह काफी खुश थी। उसे खुश देखकर समीर भी खुश हो गया था। रास्ते में समीर ने उसे बताया कि वह विभाग से निलम्बित हो गया है यह सुनकर मानसी खामोश हो गयी। परीक्षा में पास हो जाने की वजह से मानसी की नौकरी स्थाई हो चुकी थी। इधर समीर मानसी को अधिक समय देने व विभागीय कार्रवाई की जद में आने से परेशान था लेकिन उसे लगता यह था कि अगर कोई दिक्कत आयेगी तो मानसी उसे संभाल ही लेगी। एक माह के निलम्बंन के बाद समीर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। नौकरी से बर्खास्त होने के बाद समीर ने विभाग पर मुकदमा कर दिया और हाईकोर्ट में पैरवी करने लगा। धीरे-धीरे आर्थिक संकट ने उसे घेर लिया। मानसी अपनी नौकरी में बिजी हो चुकी थी। मानसी के लिये एक दो रिश्तेदार मानसी के लिये अच्छे- अच्छे रिश्ते लाने लगे। मानसी की मां को भी उसके विवाह की चिंता होने लगी थी। एक दिन जब मानसी और समीर समय निकालकर आपस में बात कर रहे थे तो मानसी ने समीर की आंखों में निहार कर कहा कि क्या मैं जिंदगी भर ऐसे ही रहूंगी, मुझे बिंदी, सिंधूर, और बनने संवरने का सौभाग्य नही मिलेगा। एक लड़का मामा ने देख रखा है लड़का नायब तहसीलदार है, सुंदर है, मैं भी उससे शादी करना चाहती हूं, सबकी इज्जत के लिये क्या तुम मेरी मदद नही करोगे ? इतना कहते हुये याचना भरी नजरों से समीर को देखते हुये मानसी रूआंसी हो गयी। समीर की आँखें  भींग चुकी थीं , पैर कांप रहे थे। एक साल से वेतन के लिये तरस रहा समीर के अंदर इतना हौसला नही था कि वह मानसी से चिल्लाकर पूछ सके कि ऐसा क्यों कह रही हो, आखिर उसमें क्या कमी है? मानसी, मैने तुम्हारा मुसीबत में साथ दिया है और मेरी नौकरी जाने के पीछे की वजह भी तुम हो लेकिन वह कह नही सका। मानसी के शब्द उसके कलेजे को भेद गये थे। वह क्षत-विक्षत हो चुका था। जैसे टूटा हुआ शीशा टूटने के बावजूद तुरंत बिखरता नही जब तक कोई उसे छू न दे वही हालत समीर की थी। वह हिम्मत संजो कर बोला “ठीक तो है” जब तुम यही चाहती हो तो तुम्हारी शादी नायब तहसीलदार से ही होगी। समीर ने कलेजे पर पत्थर रख लिया। गरीबी हालत में जितना हो सकता था उसने मानसी की शादी के लिये किया, उसने मानसी से पूछा आखिर मैं तुम्हारी शादी में क्या गिफ्ट दूं जो भी चाहे मांग लो, मैं दे दूंगा। मानसी ने कहा मुझे कुछ नही चाहिये, फिर भी समीर ने उसके लिये एक लहंगा, साड़ी और जो कुछ भी कर सकता था बिना किसी से पूछे अपना पैसा खर्च करके करता रहा। मानसी की शादी हो गयी। मानसी अपने पति के साथ खुशी से रहने लगी। इधर टूटे हुये समीर को जिंदगी बोझ लगने लगी थी। शादी के महीनों बाद वह अपने मां से जब मिलने आई तो शाम को समीर भी पहुंचा। बातें होने लगी, मानसी को अपनी शादी की तारीफ सुनने की लालसा थी। उसकी खुशी देख सब लोग उसकी हां में हां भी मिला रहे थे। फिर बात होंने लगी कि शादी में किसने क्या गिफ्ट दिया, मानसी को ससुराल से क्या मिला । मानसी अपने ससुराल से मिले गहनों को खूब बढ़ा चढ़ा कर बता रही थी। फिर मायके वालों की बारी आयी कि किसने क्या गिफ्ट दिया। तभी अचानक मानसी ने समीर से कहा कि समीर तुमने तो कोई सोने की चीज गिफ्ट में दी ही नही, समीर ने अपने हाथ में पहनी अंगूठी को निकाल मानसी की तरफ उछाल दिया, और कहा कि ले लो इसे। समीर की आंख भरी हुई थी उसने कहा मानसी तुम्हे सोना चाहिये था मैने तो तुमको तुम्हारी जिंदगी, तुम्हारी खुशी अपनी जिंदगी कुर्बान करके दे दी थी मेरे पास बचा ही क्या था जो तुमको देता। मेरी जिंदगी की कीमत सोने की कीमत के आगे फीकी पड़ गयी होगी, कहते हुये समीर मानसी घर से बाहर निकल गया था।


अब आप बताईये........


 जिस मानसी की वजह से समीर की पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई, वह अकेलेपन का शिकार होकर डिप्रेशन में चला गया, उसकी नौकरी छूट गयी, वह समीर जिसने मानसी का जीवन बनाने के लिये अपनी खुशियों का होम कर दिया। वह समीर जो मानसी की आंखों में आंसू नही देख सकता था, वह समीर जो मानसी के लिये पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार था। उस समीर की पूरी कुर्बानी एक सोने के आर्नामेंट के आगे फीकी पड़ गयी थी।  


तो ”जिंदगी से कीमती सोना हुआ कि नही”


(कहानी पढ़कर कमेंट करना मत भूलियेगा)


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