घाव देते हैं और मरहम की बात करते हैं

 शहर में रहते हैं और गावों की बात करते हैं 

पेड़ काटते हैं और छांवों की बात करते हैं।

रिश्ता  इनसे रखे भी तो कोई कैसे रखें

घाव देते हैं और मरहम की बात करते हैं

हर जगह ऐसे लोगों का हुजूम है दोस्त जो

निवाले छीनते हैं और रोटियों की बात करते हैं

दिख जाएंगे ये लोग कहीं न कहीं भीड़ में

आबरू लूटते हैं और इज्जत की बात करते हैं।

प्रदीप तिवारी




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