शहीद मेला: इस बार लड़ाई होगी वो भी कोरोना से !

वीर रामसमुझ यादव की याद मे लगने वाला मेला स्थगित

घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगें मेला समिति के लोग बांटेंगे मास्क, सेनेटाइजर व गमछा, साबुन  

   शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले

   वतन पर मरने वालों की यही बाकी निशां होगी 


जगदंबा प्रसाद मिश्र हितैषी की ये लाईनें कारगिल में भारत माता के दुश्मनों से लड़कर शहीद हुये वीर रामसमुझ यादव के शहादत दिवस 30 अगस्त को सगड़ी तहसील के नत्थूपुर गांव मे हर वर्ष लगने वाले मेले में इस वर्ष फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। कारण सबको पता है कोविड-19 की वैश्विक महामारी। इस महामारी से प्रभावित हमारे देश में आज यह सबसे जरूरी रह गया है कि सार्वजनिक समारोह न हो। शारीरिक दूरियां बनी रहें जिसको देखते हुये इस वर्ष का शहीद मेला स्थगित कर दिया गया है। मेले के स्थगित होने का यह कहीं से मतलब नही है कि हम मां भारती के अमर पुत्र वीर रामसमुझ को अपनी पुष्पांजलि न दे। इस वर्ष का शहीद मेला एक अनोखे अंदाज में होगा कोई भीड़ नही होगी, कोई आयोजन नही होगा इस बार लड़ाई होगी वो भी कोरोना से । एक सैनिक की तर्ज पर कोरोना से लड़ाई के लिये रामसमुझ यादव को अपना बेटा, भाई, पिता मानने वाले लोग तैयार हैं, इन लोगों ने निर्णय किया है कि वीर रामसमुझ यादव के नाम का प्रण लेकर हम निकलेंगें गांव-गांव जायेंगें कोरोना के खतरे प्रति लोगों को जागरूक करेंगें। जिनको जरूरत होगी उनको मास्क, सेनेटाइजर, गमछा, साबुन आदि देंगें। यह टीम पूरे माह भर शासन, प्रशासन की मंशा के अनुरूप लोगों को जागरूक करेगी, और शायद यही रामसमुझ यादव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सगड़ी तहसील के नत्थुपुर गांव निवासी रामसमुझ यादव ने  कारगिल के तुरतुर्क पहाड़ी पर अपने ए.के 47 से वीरता की वो इबारत लिखी है जो आने वाली पीढ़ीयां नहीं भूल सकतीं यही कारण रहा कि सेना ने उन्हे मेंशन इन डिस्पैच की उपाधि से नवाजा है। 30 अगस्त 1999 को दुश्मनों से लड़ते हुये शहीद हुये वीर रामसमुझ यादव की याद में प्रति वर्ष उनके पैतृक गांव नत्थुपुर में एक शहीद मेले का आयोजन किया  जाता है। मेले की भव्यता इस बात से ही लगाई जा सकती है कि किसी शहीद की याद मे पूर्वांचल का यह सबसे बड़ा मेला लगता है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रहे हों या परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव सबने अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर वीर रामसमुझ यादव को पुष्पांजलि अर्पित कर चुके हैं। मेले में उमड़ने वाली हजारों की भीड़ यह बताती है कि पूर्वांचल की माटी ने ऐसे लाल जन्मे हैं जिनके वीरता के दम पर देश की एकता अखण्डता अक्षुण है। हर साल लगने वाले इस मेले पर इस वर्ष कोविड-19 वैश्विक महामारी का ग्रहण लगा है। मेले में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। शासन व प्रशासन की मंशा के अनुरूप इस बार किसी तरह का सार्वजनिक आयोजन नही होगा, केवल शहीद के परिजन पुष्पांजलि अर्पित कर अपने वीर को श्रद्धांजलि देंगे। मेले के संयोजक कारगिल शहीद रामसमुझ यादव के छोटे भाई प्रमोद यादव लगातार सबसे अपील भी कर रहे हैं कि अपने घरों से ही इस बार पुष्पांजलि व श्रद्धांजलि अर्पित करें। शहीद मेला समिति ने इस बार का मेला एक अनोखे अंदाज में मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष न भीड़ होगी न कोई आयोजन, मेला समिति से जुड़े लोग  देश पर आई विपदा को देखते हुये इस महामारी से अपने अंदाज में लड़ने का फैसला किया है। इस बार समिति के लोग गांव-गांव जाकर कोविड -19 से बचाव के प्रति लोगो को जागरूक तो करेंगें ही, साथ ही लोगों को मास्क, सेनेटाइजर, गमछा, साबुन आदि मुहैया करायेंगें।  मेले के संयोजक प्रमोद यादव ने बताया कि यह एक ऐसी लड़ाई से जिससे जंग जीतनी जरूरी है, उन्होने कहा कि इस वर्ष शहीद मेले का आयोजन नही कर रहे है लेकिन अपने भाई वीर रामसमुझ यादव की जो सोच थी उसे ध्यान में रखकर हम देश के लोगों की प्राण की रक्षा के लिये कदम बढायेंगें, जितना हो सकेगा हम पम्पलेट बांट कर जागरूक करेंगें व जिनकी पहुंच मास्क, सेनेटाइजर तक नही है उन्हे यह उपलब्ध करायेंगें। उन्होने बताया कि यह कार्य  पूरे एक माह तक लगातार करेंगें। देशवासियो की रक्षा ही एक सैनिक का ध्येय होता है इस कार्य से बढ़कर वीर रामसमुझ यादव को और कोई सच्ची श्रद्धांजलि नही हो सकती।

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