नीट में चयनित हुए विश्वमित्र, खुशी
पिता व दादा जी की तरह करना चाह रहे नर सेवा
एक लक्ष्य व कडे़ परिश्रम से मिली सफलता
आजमगढ। सगड़ी तहसील के जीयनपुर नगर पंचायत निवासी डा. नरेंद्र त्रिपाठी के छोटे पु़त्र विश्वमित्र त्रिपाठी का चयन नीट मंे होने से खुशी की लहर दौड़ गयी। बचपन से प्रतिभावान विश्वमित्र के चयनित होने पर लोगों ने बधाईयां दी ।
जीयनपुर नगर पंचायत निवासी पेशे से चिकित्स डा. नरेंद्र त्रिपाठी के सबसे छोटे पु़त्र विश्वमित्र त्रिपाठी का बचपन से ही यह सपना था कि वह चिकित्सक बन पिता की तरह जनसेवा करे। नर सेवा नारायण सेवा का सुत्र मानकर कार्य करने वाले विश्वमित्र के दादा डा. विजय बहादुर ़ित्रपाठी भी ग्रामीण अंचल में चिकित्सा का कार्य सेवा के भाव से ही करते रहे। अपने दादा व पिता के कार्यों से प्रेरणा लेकर विश्वमि़त्र भी चिकित्सक बनना चाह रहे थे। एक लक्ष्य बनाकर उन्होने प्रयास किया। विश्वमित्र की प्राथमिक शिक्षा चिल्ड्रेन सीनियर सेकेण्डरी आजमगढ़ से इसके उपरांत हाईस्कूल की परीक्षा डीपीएस काशी से उत्तीर्ण की। विश्वमित्र ने इण्टरमीडियेट की परीक्षा लगभग 94 प्रतिशत के साथ डीपीएस काशी को टाप किया। प्रथम प्रयास में विश्वमि़त्र नीट में उत्तीर्ण रहे। चयन में विवाद सामने आया। अगले प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वमि़त्र ने 9499 रैंक हासिल की। जनरल कैटगरी में रैंक 5317 रैंक रही । आल ओवर इंडिया में इस रैंक से विश्वमि़त्र को सरकारी कालेजों में प्रवेश तय माना जा रहा है। विश्वमि़त्र ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता व माता श्रीमती शशिबाला, दादा जी सहित पूरे परिवार व शिक्षकों को दिया है। चयन की सूचना पर डा़ नरेन्द्र त्रिपाठी के आवास पर पहुंच कर लोगों ने बधाई दी जिसमें आनंद प्रकाश तिवारी, ज्ञानेंद्र मिश्रा, प्रदीप तिवारी, पंचानद तिवारी, झिन्नू पण्डित, जयशंकर सिंह, डा़ डी के वर्मा, दयाशंकर राय, हरिश्चद्र जायसवाल दूधनाथ चैरसिया, शिवदान चैरसिया सहित दर्जनों लोग शामिल रहे।
एक लक्ष्य व कडे़ परिश्रम से मिली सफलता
आजमगढ। सगड़ी तहसील के जीयनपुर नगर पंचायत निवासी डा. नरेंद्र त्रिपाठी के छोटे पु़त्र विश्वमित्र त्रिपाठी का चयन नीट मंे होने से खुशी की लहर दौड़ गयी। बचपन से प्रतिभावान विश्वमित्र के चयनित होने पर लोगों ने बधाईयां दी ।
जीयनपुर नगर पंचायत निवासी पेशे से चिकित्स डा. नरेंद्र त्रिपाठी के सबसे छोटे पु़त्र विश्वमित्र त्रिपाठी का बचपन से ही यह सपना था कि वह चिकित्सक बन पिता की तरह जनसेवा करे। नर सेवा नारायण सेवा का सुत्र मानकर कार्य करने वाले विश्वमित्र के दादा डा. विजय बहादुर ़ित्रपाठी भी ग्रामीण अंचल में चिकित्सा का कार्य सेवा के भाव से ही करते रहे। अपने दादा व पिता के कार्यों से प्रेरणा लेकर विश्वमि़त्र भी चिकित्सक बनना चाह रहे थे। एक लक्ष्य बनाकर उन्होने प्रयास किया। विश्वमित्र की प्राथमिक शिक्षा चिल्ड्रेन सीनियर सेकेण्डरी आजमगढ़ से इसके उपरांत हाईस्कूल की परीक्षा डीपीएस काशी से उत्तीर्ण की। विश्वमित्र ने इण्टरमीडियेट की परीक्षा लगभग 94 प्रतिशत के साथ डीपीएस काशी को टाप किया। प्रथम प्रयास में विश्वमि़त्र नीट में उत्तीर्ण रहे। चयन में विवाद सामने आया। अगले प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वमि़त्र ने 9499 रैंक हासिल की। जनरल कैटगरी में रैंक 5317 रैंक रही । आल ओवर इंडिया में इस रैंक से विश्वमि़त्र को सरकारी कालेजों में प्रवेश तय माना जा रहा है। विश्वमि़त्र ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता व माता श्रीमती शशिबाला, दादा जी सहित पूरे परिवार व शिक्षकों को दिया है। चयन की सूचना पर डा़ नरेन्द्र त्रिपाठी के आवास पर पहुंच कर लोगों ने बधाई दी जिसमें आनंद प्रकाश तिवारी, ज्ञानेंद्र मिश्रा, प्रदीप तिवारी, पंचानद तिवारी, झिन्नू पण्डित, जयशंकर सिंह, डा़ डी के वर्मा, दयाशंकर राय, हरिश्चद्र जायसवाल दूधनाथ चैरसिया, शिवदान चैरसिया सहित दर्जनों लोग शामिल रहे।

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