गर्व पूर्वक होती है आज स्वदेशी की बात: केशव प्रसाद मौर्य

विविध विश्वविद्यालयों के कुलपतियो ने दी विकसित भारत की रूप रेखा,
दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला का उपमुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन

प्रदीप तिवारी की रिपोर्ट






आजमगढ़। जनपद मुख्यालय स्थित हरिऔध कला भवन में गुरूवार को ब्रह्मर्षि स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा न्यास व महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय एवं अन्य विश्वविद्यालयों के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी व सहकार्यशाला को संबोधित करते हुये प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पहले स्वदेशी की बात करने में पूर्व की सरकार मेें बैठे लोग शर्म महसूस करते थे, आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या प्रदेश के मुख्यमंत्री सभी लोग स्वदेशी की बात गर्व पूर्वक करते हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने हमे विकसित भारत बनाने का लक्ष्य दिया है लेकिन विकसित भारत बनाने का कार्य हम सबको मिल कर करना होगा।


 

उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य ब्रह्मर्षि स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा न्यास, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़, यूनिवर्सिटी ऑफ अग्दर नॉर्वे, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, अमरकंटक केंद्रीय विश्वविद्यालय,स्वदेशी शोध संस्थान,रूहुना विश्वविद्यालय श्रीलंका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “ज्ञान पर ध्यान और पूर्ण रोजगारयुक्त भारत के लिए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका” विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सह-कार्यशाला के उद्घाटन सत्र कों संबोधित कर रहे थे। हरिऔध कला केंद्र आयोजित इस समारोह को संबोधित करते उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि एक समय था जब हम दुनिया के सामने हाथ फैलाते थे पर आज यह समय है कि दुनिया के देश भारत को आशा भरी निगाहों से देखतें हैं कि कहीं अगर कुछ होता है तो भारत सबसे पहले मदद के लिये तैयार रहता है। कोरोना काल में दुनिया ने इस सच्चाई को स्वीकारा है। उन्होने कहा कि आज यह हमारे प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कालेज व विश्वविद्यालय देने का हम काम कर रहे हैं। उन्होने कहा कि विकास का रास्ता गावांे से होकर जाना चाहिये। उन्होने कहा कि आज देश व प्रदेश संभावनाओं का प्रदेश और देश है। सोमनाथ मंदिर का जिक करते हुये उन्होने कहा कि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्वाभिमान दिवस मनाया जा रहा है। दुनिया के अंदर देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है तो देश के अंदर प्रदेश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। उन्होने युवाओं का आह्वाहन करते हुये उन्होने कहा कि आप आगे बढ़ो, सरकार और संगठन आप के साथ है। इसके पूर्व संगोष्ठी सह कार्यशाला का उद्धाटन स्वामी सहजानंद सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि व दीप प्रज्जवलन से हुआ। 


समारोह को संबोधित करते हुये स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल ने कहा कि अगर अमेरिका इसी तरह से टैरिफ लगाता रहा तो भारत 2047 क्या उसके पहले ही अपने स्वदेशी उत्पादों के दम पर विकसित हो जायेगा। उन्होने कहा कि बाजारों से स्वदेशी सामान लाने से देश के किसानों का फायदा होता है इसलिये हम सबको स्वदेशी अपनाना होगा। उन्होने बड़े ही सारगर्भित तरीके से अपनी बात रखते हुये कहा कि आज देश का युवा स्वदेशी रोबोट व चंद्रयान की बात करता है जो कि एक बड़ा बदलाव है। प्रोफेसर राजकुमार मित्तल ने कहा कि विकसित भारत का सपना तब तक साकार नही हो सकता जब तक इसमें सभी व्यक्तियों, युवा, किसान, व्यापारी, नारी शक्ति की समान रूप से भागीदारी नही होती। उन्होने कहा कि युवाओं की मानसिकता नौकरी मांगने की जगह स्वरोजगार अपनाना चाहिये, इसके लिये विश्वविद्यालयों व शैक्षिक संगठनों को मिलकर कार्य करने की जरूरत है।


टेक्नोक्रेट व नीति निर्माता के रूप में अपनी पहचान रखने वाले डा. ओमकार राय ने कहा कि भारत एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। उन्होने कहा देश के प्रधानमंत्री का एक सपना है कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, विकसित भारत के फार्मेट में रोजगार युक्त भारत जिसमें हर हाथ को काम हो। उन्होने यह केवल नारा नही है उसके लिये ऐसी संगोष्ठियां नितांत आवश्यक हैं। पद्म श्री अवार्डी व द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कबड्डी की कोच व लेखिका डा. सुनील डबास की एशियाड गोल्ड मेडल को हासिल करने की कहानी सुनकर हर कोई भावुक हो उठा। अतिथियों का महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा कि यह संगोष्ठी एक अन्तर्राष्ट्री संगोष्ठी व सह कार्यशाला है जो देश के विकास के रास्ते पर विमर्श पैदा करेगी। 


अतिथियों का स्वागत करते हुये कार्यक्रम के संयोजक व क्षेत्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी गोरखपुर सहजानंद राय ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने देश की आजादी से पहले एक किसानों के लिये व देश के लिये जो कार्य किया है वह अनुकरणीय है यह संस्था उनके विचारों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। इसी के तहत इस संगोष्ठी का आयोजन हुआ है उन्होने कहा कि ज्ञान का सही अर्थ गरीब, युवा, अन्नदाता व नारीशक्ति में छिपा हुआ है इनका उत्थान की कुंजी शिक्षा में निहित है। कार्यक्रम की अध्यक्षत अनंत विभूषित जगद्गुरू शंकराचार्य अनन्तानंद सरस्वती व संचालन अवनीश राय मानस ने किया। समारोह में अपने- अपने क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले उद्यमियों, किसानों, समाजसेवियों, खिलाड़ियों को उपमुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। समारोह में विविध विश्वविद्यालयों के शोधार्थी, विद्यार्थी, प्रोफेसर, शिक्षक, किसान, उद्यमियों के साथ के साथ प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह, विनोद राजभर, विनोद राय, प्रवीण कुमार सिंह, मनीष मिश्र, कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा, सूरज प्रकाश श्रीवास्तव, आशीष सिंह, प्रज्ञा राय, माला द्विवेदी, ममता चौधरी वीरभ्रद प्रताप सिंह, रामाश्रय राय, दिनेश पाण्डेय, प्रदीप राय, एस के सत्येन, कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा, अरविंद चित्रांश, अतुल राय, अशोक राय, प्रवीण राय, प्रदीप सिंह, अनिल राय,मुकेश सिंह राजपूत प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। 



डा. सुनील डबास की कहानी ने किया भावुक


आजमगढ़। अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल होने आई पद्म श्री अवार्डी व द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कबड्डी की कोच व लेखिका डा. सुनील डबास ने जब अपने संघर्षों की कहानी सुनाई तो हरिऔध कला भवन में बैठा हर शख्स भावुक हो उठा। हरियाणा राज्य में कोई ट्रैक सूट पहन कर कोई खेलने नही देता था। मैं छिप छिप करके ट्रैक सूट पहन कर मिट्टी में खेल की प्रैक्टिस किया जब एशियन गेम में गोल्ड आया तो वही गांव जो ट्रैक सूट नही पहनने देता था गांव में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाकर पूरे गांव को दिखाया। सामाजिक बंधनों को तोड़ने के लिये कुछ कर दिखाने की जरूरत है। उन्होने कहा उसी गांव के लोग तीन सौ से चार सौ ट्रैक्टरों में भरकर लोग हमारे स्वागत को एयर पोर्ट पहुंचे। सेना की पृष्ठभूमि से जुड़ी सुनील डबास ने कहा उनके पिता ने कहा कि सन 1962 में चीन से हम हारे थे लेकिन खेल में नही हारना है उनका यह वाक्य प्रेरणा बना था और हम चीन में भारतीय परचम लहराने में सफल हुये

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