.. इस तरह तो बन चुका आजमगढ़ में विश्वविद्यालय!
बहाना दर बहाना
... इस तरह तो बन चुका आजमगढ़ में विश्वविद्यालय!
नेताओं और मंत्रियों की फौज लेकिन नही शुरू हो सकी प्रक्रिया
आजमगढ़। अल्लामा शिब्ली नोमानी, कैफी आजमी, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, आचार्य चंद्रबली पाण्डेय, पंडित छन्नूलाल मिश्र,पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र जी की धरती आजमगढ़ की बौद्धिकता का लोहा कौन नही मानता? जनपद की उर्वर धरती ने ऐसी मेधाओं को जन्म दिया है जो विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा बिखेरती रही हैं। वर्तमान में जनपद में विकास भी हो रहा है, सड़के बन रही हैं, पुल बन रहे हैं, नालियां, बिजली पानी सबके लिए काम हो रहा है,कंक्रीट के जंगलों के निर्माण के लिए सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। सरकार चाहती है तो कि उसके बनाये कंक्रीट के आशियाने में ऐसे लोग रहे हैं जो देखने में मनुष्य जैसे लगे लेकिन उनका मानसिक स्तर ऐसा हो कि वे कुछ सोच समझ नही सके । ऐसा इसलिये कहा जा रहा है कि हर चीज के लिए धन है लेकिन एक ऐसी जरूरत जिसके पूरी होने से आजमगढ़ियों का स्तर में उछाल आ जाय बस वही नही हो रहा है। आजमगढ़ में एक विश्वविद्यालय की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन स्थानीय नेता, विधायक, मंत्री केवल आश्वावासनों की घुट्टी पिला रहें और अधिकारी बहाना दर बहाना गा रहे हैं। ऐसे तो पूरा हो चुका आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाने का सपना!
आजमगढ़ के महाविद्यालय पूर्वांचल विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं। जिस समय पूर्वांचल विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ उस समय उससे सम्बद्ध महज 65 महाविद्यालय थे। वर्तमान अकेले आजमगढ़ जनपद में 200 से अधिक महाविद्यालय हो चुके हैं। वर्तमान में पूर्वांचल विश्विद्यालय में 600 से अधिक महाविद्यालय सम्बद्ध हो चुके हैं। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से आजमगढ़ अन्य किसी जनपद से कमतर नही है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर बढ़ते कामकाजी बोझ की वजह से एक और विश्वविद्यालय की जरूरत शिद्दत से महसूस की जा रही है। शिक्षा के विकास के लिए वही सोच सकता है जो उसके महत्व को समझता हो। वर्तमान प्रदेश सरकार के पास नेताओं की तो बड़ी फौज है लेकिन शिक्षा के विकास को विकास नही समझते वो समझते हैं तो केवल भौतिक सुख सुविधाओं के विकास को ही विकास मानते हैं। आजमगढ़ का बुद्धिजीवी तबका लगातार आजमगढ़ मे विश्वविद्यालय की मांग उठा रहा है लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों को यह तो मुद्दा तो लग रहा है लेकिन उनके नजरियो से फायदे मंद नही हैं। विश्वविद्यालय की शिक्षा से जुड़ने वाला आज जात पात की राजनीति करने वाले नेताओं का तो पिठ्ठू तो बनेगा नही शायद यही लग रहा है यहां के नेताओं को, सो नही है विश्वविद्यालय तो न सही। नेता तो नेता पढ़ लिख कर अधिकारी बनने वाला तबका बहाने पर बहाने गढ़ रहा है। पहले यह कहा गया कि आजमगढ़ में जमीन ही नही है जब यहां के लोगों ने जमीनों की सूची सौंपी तो अधिकारियों द्वारा कहा गया कि 300 एकड़ जमीन चाहिये। विश्वविद्यालय के लिए कैम्पेन चलाने वाले डीएवी पी जी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुजीत भूषण जब आर टी आई के द्वारा पूरे प्रदेश के 26 राज्य विश्वविद्यालयों के लिए उपलब्ध जमीनों की सूची प्राप्त की तो अधिकांश विश्वविद्यालय एक सौ से डेढ़ सौ एकड़ में ही बने निकले। अब सवाल यह है कि आजमगढ़ के लिए आखिर क्यों 300 एकड़ जमीन मांगी जा रही थी। सच्चाई खुद ब खुद सामने थी अधिकारियों की मंशा विश्वविद्यालय को लेकर साफ नही है। तभी तो 18 सितम्बर को दिये ज्ञापन जिसमे जनपद में उपलब्ध विश्वविद्यालय के लिए उपयुक्त जमीनों की सूची थी उसे शासन में नही प्रेषित किया है।
... इस तरह तो बन चुका आजमगढ़ में विश्वविद्यालय!
नेताओं और मंत्रियों की फौज लेकिन नही शुरू हो सकी प्रक्रिया
आजमगढ़। अल्लामा शिब्ली नोमानी, कैफी आजमी, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, आचार्य चंद्रबली पाण्डेय, पंडित छन्नूलाल मिश्र,पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र जी की धरती आजमगढ़ की बौद्धिकता का लोहा कौन नही मानता? जनपद की उर्वर धरती ने ऐसी मेधाओं को जन्म दिया है जो विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा बिखेरती रही हैं। वर्तमान में जनपद में विकास भी हो रहा है, सड़के बन रही हैं, पुल बन रहे हैं, नालियां, बिजली पानी सबके लिए काम हो रहा है,कंक्रीट के जंगलों के निर्माण के लिए सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। सरकार चाहती है तो कि उसके बनाये कंक्रीट के आशियाने में ऐसे लोग रहे हैं जो देखने में मनुष्य जैसे लगे लेकिन उनका मानसिक स्तर ऐसा हो कि वे कुछ सोच समझ नही सके । ऐसा इसलिये कहा जा रहा है कि हर चीज के लिए धन है लेकिन एक ऐसी जरूरत जिसके पूरी होने से आजमगढ़ियों का स्तर में उछाल आ जाय बस वही नही हो रहा है। आजमगढ़ में एक विश्वविद्यालय की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन स्थानीय नेता, विधायक, मंत्री केवल आश्वावासनों की घुट्टी पिला रहें और अधिकारी बहाना दर बहाना गा रहे हैं। ऐसे तो पूरा हो चुका आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाने का सपना!
आजमगढ़ के महाविद्यालय पूर्वांचल विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं। जिस समय पूर्वांचल विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ उस समय उससे सम्बद्ध महज 65 महाविद्यालय थे। वर्तमान अकेले आजमगढ़ जनपद में 200 से अधिक महाविद्यालय हो चुके हैं। वर्तमान में पूर्वांचल विश्विद्यालय में 600 से अधिक महाविद्यालय सम्बद्ध हो चुके हैं। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से आजमगढ़ अन्य किसी जनपद से कमतर नही है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर बढ़ते कामकाजी बोझ की वजह से एक और विश्वविद्यालय की जरूरत शिद्दत से महसूस की जा रही है। शिक्षा के विकास के लिए वही सोच सकता है जो उसके महत्व को समझता हो। वर्तमान प्रदेश सरकार के पास नेताओं की तो बड़ी फौज है लेकिन शिक्षा के विकास को विकास नही समझते वो समझते हैं तो केवल भौतिक सुख सुविधाओं के विकास को ही विकास मानते हैं। आजमगढ़ का बुद्धिजीवी तबका लगातार आजमगढ़ मे विश्वविद्यालय की मांग उठा रहा है लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों को यह तो मुद्दा तो लग रहा है लेकिन उनके नजरियो से फायदे मंद नही हैं। विश्वविद्यालय की शिक्षा से जुड़ने वाला आज जात पात की राजनीति करने वाले नेताओं का तो पिठ्ठू तो बनेगा नही शायद यही लग रहा है यहां के नेताओं को, सो नही है विश्वविद्यालय तो न सही। नेता तो नेता पढ़ लिख कर अधिकारी बनने वाला तबका बहाने पर बहाने गढ़ रहा है। पहले यह कहा गया कि आजमगढ़ में जमीन ही नही है जब यहां के लोगों ने जमीनों की सूची सौंपी तो अधिकारियों द्वारा कहा गया कि 300 एकड़ जमीन चाहिये। विश्वविद्यालय के लिए कैम्पेन चलाने वाले डीएवी पी जी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुजीत भूषण जब आर टी आई के द्वारा पूरे प्रदेश के 26 राज्य विश्वविद्यालयों के लिए उपलब्ध जमीनों की सूची प्राप्त की तो अधिकांश विश्वविद्यालय एक सौ से डेढ़ सौ एकड़ में ही बने निकले। अब सवाल यह है कि आजमगढ़ के लिए आखिर क्यों 300 एकड़ जमीन मांगी जा रही थी। सच्चाई खुद ब खुद सामने थी अधिकारियों की मंशा विश्वविद्यालय को लेकर साफ नही है। तभी तो 18 सितम्बर को दिये ज्ञापन जिसमे जनपद में उपलब्ध विश्वविद्यालय के लिए उपयुक्त जमीनों की सूची थी उसे शासन में नही प्रेषित किया है।
Great job........carry on............ jarur milega university
जवाब देंहटाएंyou have good writing skills
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