.. यहां जुम्मन के घर में आज फूटी रकाबी है

.. यहां जुम्मन के घर में आज फूटी रकाबी है
जनपद के विकास का सच नहीं देखता कोई हाकिम
जनपद के युवाओं को नही दिख रही आशा की किरण
बेरोजगारी की समस्या ज्यों की त्यों
40 लाख की आबादी सबसे बड़ी समस्या पर नही हुई है कोई पहल
आजमगढ़। आजमगढ़ जनपद अब केवल एक मंडल मुख्यालय नही रह गया है अब यह समाजवादी पार्टी जिसकी सरकार प्रदेश में है के सुप्रिमों मुलायम सिंह यादव का संसदीय क्षेत्र है। नेता जी ने  देर से ही तमौली गांव को गोद लेकर प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही आदर्श सांसद ग्राम योजना का सम्मान ही किया। लेकिन इसके साथ साथ ही जनपद की शेष बची 1616 ग्राम पंचायतें आशा भरी  निगाहों से समाजवादी मुखिया की ओर निहार रही हैं। ऐसी बात नही है कि इन ग्राम पंचायतों के विकास के लिए योजनायें नही हैं योजनायें तो हैं लेकिन उन पर अमल कितना हुआ यह देखने के लिए किसी के पास मौका नही है। न तो माननीयों के पास न ही हाकिमों के पास। हाकिम तो देखने से  बचते हैं क्योंकि विकास निधि का एक बड़ा हिस्सा कमीशन के रुप में उनकी जेबें जो भरता है।
  गत दिनों मुलायम सिंह यादव की फटकार के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विकास कार्यों की हकीकत देखने की थोड़ी सी जहमत उठाई जिसकी वजह से जिले में जमे हाकिमों की तंद्रा थोड़ी बहुत भंग  हुई थी, इक्का दुक्का कार्य भी  सम्पन्न कराये गये। उधर मुख्यमंत्री के तेवर ठंडे हुए और जिलों में साहबों को अपनी गर्म लिहाफों में दुबकने का मौका मिल गया। अपने जन्मदिन के मौके पर सपा सुप्रिमों ने एक बार फिर अपनी ही सरकार की खिंचाई कर यह तो साबित कर दिया है कि वह निर्विवाद रुप से विकास के पक्षधर हैं और समाजवादी सोच रखते हैं लेकिन क्या उनके पार्टी के कर्णधार वही  सोच रखते हैं। जनपद के समाजवादियों के कद और रसूख बढ़ते जा रहे हैं जांच कराई जाय तो लगभ ग सबकी सम्पत्ति में बेहिसाब हिजाफा हुआ होगा। विकास के कार्य जो ठेकों पर हो रहे हैं उनको लेकर आम आदमी के पास यह संदेश जा रहा है कि यह काम अमुक समाजवादी नेता के जिम्मे है तो दूसरा काम दूसरे समाजवादी के जिम्मे । कार्यों की गुणवत्ता तो माशाल्लाह पूछिये मत। बड़े तो बड़े छोटे समाजवादी भी  ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों के कार्यों का ठेका लेने में खासी रूचि रख रहे हैं।  पूरे जनपद में विकास  हो रहा है लेकिन विकास कहीं दिख नही रहा। विकास केवल हो रहा है तो समाजवादी खाल ओढ़े उन नेताओं का जिन्हे शायद समाजवाद से कोई सरोकार नही है। वर्तमान में समाजवादी पार्टी के किसी आयोजन में जिस तरह से गीत गानों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समाजवादी नेताओं द्वारा हजारों- हजार रुपये ईनामें के रुप में लुटाये जाते हैं वह आम जनता को सोचने पर मजबूर कर देता है कि कहीं यह उनकी गाढ़ी कमाई तो नही जो विविध माध्यमों से होता हुआ आसमान में उड़ रहा है। आजमगढ़ से गोरखपुर जाने वाली सड़क पर इतनी धूल उड़ती है कि सड़क दिखती ही नही। शहर की सड़कें भी  बदहाल है। विद्युत की भूमिगत केबिलें बिछाई जा रही हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता को कोई देखना भी  नही चाह रहा है।  पूरा जनपद में गंदगी का अम्बार है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मारा मारी मची है। मंडलीय अस्पताल के लिए  12.88 करोड़ की लागत से आधुनिकीकरड़ कर उसे सुसज्जित करने कार्य का आदेश हो चुका  है। प्रदेश सरकार ने धन मुहैया तो करा दिया लेकिन किस स्तर का कार्य हो रहा है यह कोई नहीं जांचना चाहता । ऐसे में काम होगें भी तो उनपर कमीशन खोरी की छाप साफ-साफ दिखाई देगी। कहा जा रहा है इस काम में भी जबरदस्त खिंचतान मची हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का भी जमीनी स्तर पर बुरा हाल है। समाजवादी एम्बूलेंस को ही ले लिजिये। 108 नम्बर पर काल करिये तो आवाज आती है , अभी एम्बूलेंस खाली नही है। या अगर खाली है तो ड्राईवर द्वारा कहा जाता है कि वह जाम में फसा है दूसरे ब्लाक की एम्बूलेंस मंगवा लें। कौशल विकास मिशन का जोर शोर से हल्ला मचा लेकिन ऐसा नही लग रहा है कि प्रदेश की बेरोजगारी का स्तर कहीं से कम हो रहा है। शिक्षा व्यवस्था के लिए समाजवादी सरकार की उदासीनता जग विख्यात है। भाजपा सरकार का नकल अध्यादेश खत्म करने के आदेश के बाद से पूरे प्रदेश में कोई सरकार नकल पर प्रभावी रोक नही लगा सकी। नतीजा पढ़े लिखे बेरोजगारों की फौज सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। प्रदेश सरकार के पास के कोई ऐसी कारगर योजना नही है जो बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम कस सके। अदम गोंडवी का शेर मौजू हो रहा है.. तुम्हारी मेंज चांदी की तुम्हारे जाम सोने के,यहां जुम्मन के घर में आज भी  फूटी रकाबी है, तुम्हारे फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यह आकड़ें झूठे हैं और यह दावा किताबी है।

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